पॉजीटिव सोच और नेगेटिव सोच…..

प्रत्येक मनुष्य मे सकारात्मक एवं नकारात्मक विचार चलते रहते हैं । इनमे से किसी एक के पोषण से दूसरा कमजोर हो जाता है । सकारात्मक सोच व्यक्तियो की वास्तविक प्रतिभा को उभारकर उन्हे असंभव से संभव करने मे सहायक होती है जबकि नकारात्मक सोच व्यक्ति में हीन भावना का भाव उत्पन्न कर लक्ष्य के मार्ग मे भी बाधा उत्पन्न करती है अतः किसी भी लक्ष्य प्राप्ति के लिये सकारात्मक सोच अति आवश्यक हैं ।

  सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति रोगी मनुष्य को भी स्वस्थ होने मे मदद के साथ ही आसपास के वातावरण को खुशनुमा बना सकते है जबकि नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति स्वस्थ व्यक्ति को भी रोगी बनाने के साथ ही आसपास के वातावरण को बोझिल बना सकते हैं ।इसलिये प्रत्येक मनुष्य को चाहिये कि वे अपने मन मे सकारात्मक सोच ज्यादा से ज्यादा रखे जिससे नकारत्मक सोच चली जाये और सकारात्मकता उन्हे अपने उद्देश्यो की प्राप्ति मे सहायक हो ।। सकारात्मक सोच से संबंधित एक सुंदर कथा…..

कहानी —मज़दूर के बच्चे की सकारात्मक सोच ….

हमारे घर के पास काफी दिनो से एक बड़ी बिल्डिंग का काम चल रहा था। वहा रोज मजदुरों के सभी छोटे छोटे बच्चे एक दूसरे का टी शर्ट पकडकर ट्रेन ट्रेन खेल खेलते थे। रोज कोई इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे । इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते,पर केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।

उनको रोज़ देखने वाले एक व्यक्ति ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को बुलाकर पुछा -बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजिन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती ?इस पर वो बच्चा बोला कि बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई टी-शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे? और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा? इसिलिये मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हुँ । ये बोलते समय मुझे उसके आँखों में पानी दिखाई दिया। 

आज वो बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया कि अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उस में कोई न कोई कमी जरुर रहेगी । वो बच्चा रोज माँ-बाप से ग़ुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। वैसे न करते हुए उसने परिस्थितियों का समाधान ढूंढ निकाला ।दूसरी और सोचे तो पायेंगे कि हम कितना रोते है ? जैसे कि..

कभी अपने साँवले रंग के लिए, कभी छोटे क़द के लिए, कभी पड़ौसी की कार, कभी पड़ोसन के गले का हार, कभी परीक्षा में कम मार्क्स, कभी अंग्रेज़ी,कभी नौकरी या व्यापार ,कभी बीमारी तो कभी पैसों की तंगी,कभी मान सम्मान…..ना जाने कितने अनगिनत बार अपना दुखड़ा रोते रहते हैं ।अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाने के लिये हमें इन सबसे बाहर आना पड़ेगा और सकारात्मक सोच रखनी पड़ेगी

नकारात्मकता का खराब प्रभाव यह होता है कि इससे व्यक्तियो की आंखो मे भ्रम का पर्दा पड जाता है और उन्हे हर किसी मे केवल नकारात्मकता ही नजर आती है |सकारात्मक सोच के लिये दृढ़ आत्मशक्ति की आवश्यकता है ।

नकारात्मक सोच की वजह से एक सही व्यक्ति की उपेक्षा हमें जीवन भर पछताने पर मजबूर कर सकती है। सकारात्मक लोगों की सही पहचान रखें ,आप खुद भी खुश रहो,स्वस्थ रहो,मस्त रहो औरआपका जीवन मंगलमय हो

दूसरी कथा ….
सकारात्मकता और सकारात्मक पालक (मॉ-पिता)…

एक दिन एक छोटा सा बालक जो कि प्राइमरी स्कूल का छात्र था, भागते-भागते अपने घर आया और एक कागज का पन्ना अपनी माँ को दिया और बोला….मेरे शिक्षक ने यह कागज दिया है और कहा है कि इसे अपनी माँ को ही देना । उस कागज को पढ़ते ही माँ कि आँखों से आँसू बहने लगे और वो जोर-जोर से रोने लगी ।माँ को इस तरह रोता देख उस बालक ने पूछा कि…इसमें ऐसा क्या लिखा है, जो तुम ऐसे रो रही हो माँ ने सुबकते हुए अपने आँसू पोछे और बोली:- इसमें लिखा है….आपका बेटा जीनियस है, हमारा स्कूल बहुत छोटे स्तर का है और शिक्षक भी बहुत प्रशिक्षित नही है, इसलिए इसे आप स्वंय शिक्षा दे । कुछ वर्षों के बाद उस बालक कि माँ का स्वर्गवास हो गया । वो बालक थॉमस एल्वा एडिसन के नाम से विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे । इन्होंने कई महान अाविष्कार किये एक दिन वह अपनी परिवारिक वस्तुओं को देख रहे थे । अलमारी के एक कोने में उन्हें कागज का एक टुकड़ा मिला, उत्सुकतावश उसे खोलकर देखा और पढ़ने लगे  यह वही कागज था उस कागज में लिखा था कि आपका बच्चा बौद्धिक तौर पर कमजोर है, उसे इस स्कूल में अब और नही आना है । एडिसन यह पढ़कर आवाक रह गये और घण्टों तक रोते रहे, फिर अपनी डायरी में लिखा…एक महान माँ ने बौद्धिक तौर पर कमजोर बच्चे को भी सदी का महान वैज्ञानिक बना दिया ।

तो आपने देखा सकारात्मक सोच का परिणाम …धन्यवाद🙏🙏

लिखने मे गलती हो गयी हो तो क्षमाप्रार्थी 🙏🙏

            जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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