कर्मो का हिसाब- जिंदगी की किताब (पन्ना # 5)

कर्मो का हिसाब……
जन्म से मृत्यु तक सभी इंसान अपने किये हुये कर्म का फल भुगतते रहते हैं। मन ,वचन ,काया से कर्म का बंध होता हैं तो साथ मे कर्म की निर्जरा भी होती हैं।

कर्म तीन प्रकार के होते हैं

1. संचित कर्म 2.क्रियमाण कर्म 3. प्रारब्ध कर्म

इन तीनों कर्म के आधार पर मनुष्य का जीवन चक्र चलता रहता हैं और अपना आयुष्य कर्म पूरा करता हैं।कर्म का बंध कैसे होता हैं और उसका भुगतान कैसे होता हैं कहानी के माध्यम से जानेंगे……कर्मों का हिसाब 👇

मुस्कान का कॉलेज में पढ़ाई करते करते एक लड़के से प्यार हो गया ।दोनों एक दूसरे को बहुत चाहते थे इतना कि दोनों ने शादी करने का फ़ैसला कर लिया ।एक दूसरे के बिना जीने की कल्पना तक भी करते हुये उन दोनों को डर लगता था।आख़िरकार दोनों ने शादी कर ली ।शुरूआत में तो पति को पत्नी का संग बहुत अच्छा लगता था लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया आपस में मन मुटाव होने लगा और धीरे धीरे इतना बढ़ गया कि मुस्कान पर उसका पति हाथ भी उठाने लगा,हर समय गाली गलौच से ही बात की शुरूआत करता 

” मुस्कान “बहुत ही धार्मिक स्वभाव की थी । बहुत ज्यादा भजन सिमरन और सेवा भी करती थी किसी को कभी गलत न बोलना , सब से प्रेम से मिलकर रहना ,किसी का भी तिरस्कार न करना ,अपमान न करना नाम के अनुरूप हमेशा मुस्कुराते रहना ,उस की आदत बन चुकी थी ।

 वो सिर्फ एक चीज़ से दुखी थी के उस का पति उस को रोज़ किसी न किसी बात पर लड़ाई झगड़ा करता। उस आदमी ने उसे कई बार इतना मारा की उस की हाथ की हड्डी भी टूट गई थी। लेकिन मुस्कान के साथ लड़ाई झगड़ा करना,गाली गलौच करना उसके पति का रोज़ का काम था।

 एक दिन मुस्कान ने अपने गुरु महाराज जी से पूछा कि मेरे से ऐसी कौन सी भूल हो गई है कि पति मुझसे इस तरह जानवरों की तरह व्यवहार करता हैं ,जबकि मै नियमित रूप से सत्संग भी जाती हूँ ,सेवा भी करती हूँ। भजन सिमरन भी आप के हुक्म के अनुसार करती हूँ। गुरु महाराज जी ने कहा क्या वो तुझे रोटी देता है ,मुस्कान ने कहा हाँ जी देता है।गुरु महाराज जी ने कहा फिर ठीक है, कोई बात नहीं। मुस्कान ने सोचा अब शायद गुरु की कोई कृपा हो जाए और वो उस को मारना पीटना छोड़ दे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उस की तो आदत बन गई ही रोज़ अपनी घरवाली की पिटाई करना। 

कुछ साल और निकल गए उस ने फिर महाराज जी से कहा की मेरा आदमी मुझे रोज़ पीटता है। मेरा कसूर क्या है गुरु महाराज जी ने फिर कहा ,क्या वो तुम्हे रोटी देता है। मुस्कान ने कहा हाँ जी देता है। तो महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। तुम अपने घर जाओ। वह बहुत निराश होकर घर आ गई लेकिन उस के पति के स्वभाव वैसे का वैसा रहा रोज़ उस ने लड़ाई झगडा करता ।वो बहुत तंग आ गई। 

कुछ एक साल गुज़रे फिर गुरु महाराज जी के पास गई के वो मुझे अभी भी मारता है। मेरी पैर की हड्डी भी टूट गई है। मेरा कसूर क्या है। मै सेवा भी करती हूँ। सिमरन भी करती हूँ फिर भी मुझे जिंदगी में सुख क्यों नहीं मिल रहा। गुरु महाराज जी ने फिर कहा वो तुझे रोटी देता है। उस ने कहा हॉ जी देता है। महाराज जी ने कहा फिर ठीक है।लेकिन इस बार मुस्कान जोर जोर से रोने लगी और बोली की महाराज जी मुझे मेरा कसूर तो बता दो । मैंने कभी किसी के साथ बुरा नहीं किया फिर मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। 

महाराज कुछ देर शांत हुए और फिर बोले तेरा पति पिछले जन्म में तेरा बेटा था। तू उस की सोतेली माँ थी। तू रोज़ उस को सुबह शाम मारती रहती थी। और उस को कई कई दिन तक भूखा रखती थी।उसी कर्म का फल हैं।। शुक्र मना कि इस जन्म में वो तुझे रोटी तो दे रहा है। ये बात सुन कर मुस्कान एक दम चुप हो गई। गुरु महाराज जी ने कहा बेटा जो कर्म तुमने पिछली ज़िंदगी में किए थे ,उस का भुगतान तो तुम्हें अवश्य करना ही पड़ेगा । फिर उस महिला ने कभी महाराज से शिकायत नहीं की क्यों की वो सच को जान गई थी। 

इसलिए हमे भी कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए ।सबके साथ प्रेम और प्यार के साथ आत्मीयता का व्यवहार करना चाहिए। हमारी जिन्दगी में जो कुछ भी हो रहा है सब हमारे कर्मो का लेखा जोखा है। जिस का हिसाब किताब तो हमे देना ही पड़ेगा।तो क्यों नही हम अच्छे कर्म की शुरूआत (यदि नही की हो तो ) आज से ही करे ,सभी इंसान में परमात्मा देखे ,तभी ज़िंदगी सार्थक होगी।जीवन में तीन बाते कभी भी हो सकती है

1.पाप का उदय कब आ जाए

2.गति का बंध कब हो जाए

3. आयु का अंत कब हो जाए

                  जय सच्चिदानंद 🙏🙏

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

रंगबिरंगे विचार (मेरी कलमससे)

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