क्रोध (गुस्सा)-जिंदगी की किताब (पन्ना # 10)

क्रोध (गुस्सा)….
क्रोध इंसान को इतना अंधा कर देती हैं उसे अच्छे या बुरे का भान नही रहता हैं….आगे कहानी,कविता ओर विवरण के साथ पढिये….
क्रोध एक बुरी आदत हैं जिसे मनुष्य दिल से लगाये घूमता हैं यह मनुष्य के वास्तविक अस्तित्व को समाप्त कर देता हैं ।

आज के समय में क्रोध एक फैशन हो गया हैं जिसको दिखाने में व्यक्ति अपनी शान समझता हैं लेकिन इसका परिणाम बहुत खराब होता हैं। अतः सभी को अपने गुस्से पर काबू करना चाहिए ।

क्रोध मनुष्य के पतन का रास्ता हैं , यह ज्ञान को भी समाप्त कर सकता हैं |जिनमे बदले की भावना प्रबल होती हैं वो व्यक्ति अपने क्रोध पर रोक नहीं लगाते बल्कि उसमे जलकर अपने जीवन को खराब कर डालते हैं ।

जो इंसान अपनी बात को शब्दों के माध्यम से नही कह पाता वास्तव में उन्हें ही अधिक क्रोध आता हैं |क्रोध के समय व्यक्ति के बोलने की शक्ति तीव्र हो जाती हैं ऐसे में वो कुछ भी देखने एवम सोचने योग्य नहीं रह जाता |गुस्से से भरा व्यक्ति निर्णय लेने में गलती करता हैं उसे सही गलत का भेद समझ नही आता । क्रोध मे इंसान क्या कर डालता हैं ये कहानी पढिये👇👇

 राजा का क्रोध …….कहानी ….

बहुत पुराने समय की बात है । श्रेणिक नामक एक राजा था ।चेलना नाम की उसकी रानी थी । एक बार दोनों तीर्थकर महावीर के दर्शन करके लौट रहे थे, तभी रानी ने देखा की एक मुनि भयंकर शीत में बिना वस्त्र तप कर रहे है । घर लौटकर रानी को नींद आ गई । रानी चेलना का एक हाथ ठण्ड के कारण बिस्तर से बाहर रहने से अकड़ गया ।आँखे खुली तो बहुत दर्द था ।जब सेंक दिया जा रहा था तो उसके मन में सहज उस मुनि की स्मृति हो आई, जो बिना वस्त्र के भयंकर ठण्ड झेलता हुआ तप कर रहा था । वह बोल उठी,हें भगवान ! उस बेचारे का क्या हाल होगा, जब मेरा यह हाल हो गया है ।राजा ने जब ये शब्द सुने, उन्हें शक हुआ कि रानी के मन में जरुर कोई परपुरुष है । वे क्रोध में उसी समय कमरे के बाहर निकले और गुस्से से पागल होकर मन्त्री से बोले- रानी अन्दर सो रही है, तुम अन्तःपुर जला दो । इसके बाद मन शांत करने राजा भगवान महावीर के पास पहुंचे ।पहुँचते ही अंतर्यामी भगवान महावीर बोले- चेलना पतिव्रता है, पवित्र है यह तुमने क्या किया ।यह सुनकर तुरंत श्रेणिक वापस लौटे और मन्त्री से पूछा क्या तुमने महल जला दिया ? मन्त्री ने कहा जी हॉ महाराज आपकी आज्ञा थी वह कैसे मैं उल्लंघन कर सकता ।राजा यह सुनकर एकदम शोक में डूब गया । यह देखकर मन्त्री ने कहा- राजन ! दुखी न हो । मैं जानता था, आपने यह निर्णय क्रोध मे आकर लिया है । महल व रानी सुरक्षित है । राजा प्रसन्न भाव से रानी के पास पहुंचे,फिर राजा ने कभी कोई निर्णय क्रोध में, होश खोकर नहीं लिया ।

दोस्तों क्रोध या गुस्सा अपने आप में मुसीबत खडी करता है, यह दूसरो को हानि पहुंचाने के साथ ही साथ अपने आप का ज्यादा नुकसान कर लेता है । हम क्रोध में कई बार अपने कई अच्छे रिश्ते, इज्जत, विश्वास तथा और भी बहुत कुछ खो देते है । इसलिए हमें कभी भी गुस्से में कोई निर्णय नहीं करना चाहिए बल्कि उस बारे मे विचार करके उसका हल निकालना चाहिए ।

क्रोध पर कविता …….

अपने गमो को एक कोने मे रखकर , कभी गुस्सा छुपा लेते हैं

लेकिन फिर भी मन कहता है ,किसी को सब कुछ बताकर “सुनाने” को।

गुस्सा आने पर चाहते हुये भी, दिल खुलकर रो नही पाता हैं ।

लेकिन फिर भी जी भर के , आँसू बहाने का दिल करता हैं

सोचते सोचते कभी,अपने गुस्से पर भी हँसी आती हैं

तो कभी कभी सब कुछ , भुलाने का भी दिल करता हैं

कभी जिंदगी में नया हो , सोचकर अच्छा लगता हैं

लेकिन कभी ऐसे ही जिये ,जीने का मन करता हैं

कभी सारे जग को, हँसाने का मन करता है 

 गुस्से वाले क्षण मे,सभी को विदा करने का दिल करता हैं 

जहॉ प्रेम और क्षमा होती हैं वहॉ क्रोध का कोई काम नही होता हैं ।कई बार जिद की वजह से गुस्सा आता हैं और उससे अहंकार उत्पन्न होता हैं ,अहंकार से ईर्ष्या,और ईर्ष्या से हिंसा को बढ़ावा मिलता हैं । तो देखा दोस्तों,मनुष्य जिद से भी क्रोध की शुरूआत करके,किस तरह हिंसा की शुरूआत कर सकता हैं।

           लिखने में ग़लती हो गयी हो तो क्षमाप्रार्थी 🙏🙏

                          जय सच्चिदानंद 🙏🙏
रंगबिरंगे विचार (मेरी कलमससे)

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