यादें पति-पत्नी की कलम से….

आज बुढापे के उस मोड़ पर भी सुकुन की तलाश हैं ।बचपन से जवानी,जवानी से बुढ़ापा यही तो सभी की जिंदगी का दौर है  । 

लेकिन इस पूरे दौर मे हर मोड़ पर सुकुन ढूँढना चाहा लेकिन फिर भी आज तक नही मिला ।

एक शाम चाय की चुस्कियाँ लेते एक दूसरे से उदासीन,ख़ामोश दोनो पति पत्नी शून्य को निहार रहे थे ।बातचीत की दूरियाँ मे इस कदर दूर हो चुके कि ज़रूरत भर तक की बातचीत होती ,दूसरी क्या बात करे समझ ही नही आ रहा था । मन ऐसा विचलित होने लगा,घुटने लगा ।आखिरकार पत्नी ने ख़ामोशी तोड़ी ।स्त्री प्रकृति मे भावुकता ज्यादा होती है ख़ामोशी तोड़कर बातचीत थोड़े शब्दो के साथ शुरू  हुई ।

दोनो ने बचपन से आज तक की जिंदगी को टटोलना शुरू किया। पुरानी यादें ताज़ा होने लगी । मन पुरानी दुनिया मे उड़ने लगा तथा आपस मे बातचीत का दौर शुरू हो गया कि कैसे ज़िंदगी के बीस बाईस साल हवा की तरह उड़ जाते हैं ,न कोई चिंता न कोई फिक्र।बस पढ़ना,लिखना,खेलना,मौज मस्ती ,यही तो किया सब । 

फिर शुरू होती है नौकरी की खोज।नौकरी मिलने पर भी टेंशन नही ,तभी तो बोलते कि नौकरी ऐसी हैं ,वैसी हैं ,दूर नहीं पास ऐसे सौ नखरे ।ऐसा करते कई नौकरीयां छोड़ते पकड़ते ।अंत में एक नौकरी स्थिर होती है और साथ मे ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की शुरूआत । हाथ में आता है पहली तनख्वाह का चेक ।जैसे ही पैसों का चेक बैंक में जमा होता है और तभी शुरू होता है खाते में जमा होने वाले कुछ शून्यों का खेल ।ऐसा खेल जो जिंदगी के अंत तक अंतहीन खेल ही रहता हैं ।

इस तरह तीन चार साल निकल जाते हैँ । ज्यादा ख़र्चा नही करने से बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं ।

इतने मे पच्चीस वर्ष की आयु के आसपास होने को आ जाते हैं । फिर विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है । हमसफ़र कैसा चाहिये ख़्वाबों का पुलिंदा बनना शुरू हो जाता है ।सपने मे सिर्फ़ हमसफ़र को खुशी देने की ही ख़्वाहिश होती हैं व मन मे हज़ारों सपने बुन लेते है । आखिरकार खुद की या माता पिता की पसंद की लड़की से उचित समय मे विवाह हो जाता है । और ज़िंदगी का दूसरा अध्याय शुरू हो जाता है ।

शादी के पहले के दो तीन साल सपने को हकीकत मे जीने मे,सैर सपाटा ,मौज मस्ती हाथों में हाथ डालकर बातें करना और घूमना,गुलाबी और हसीन ,रसीले और रंगीन सपनों मे गुज़र जाते हैं ।  इन सभी बातो के कश्मकश के दौरान बैंक में कुछ शून्य कम हो जाते हैं क्योंकि थोड़ी मौजमस्ती, घूमनाफिरना , खरीदारी सभी मे कुछ रकम का ख़र्चा होता है ।

  पर ये दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं क्योकि सपने कब तक हकीकत की दुनिया मे पॉव जमाते ,कोई भी जमने नही देता ।दूसरे रिश्तों को ये सब अच्छा नही लगता ,वो सब पूरी ताक़त लगाकर तानो से,उलाहनों से ,व्यंग्य के बाणों से हमारी जिंदगी को घायल कर देते । साथ मे रिश्तेदारों की एक ख़ासियत कि सभी सम्बंधियों के साथ प्रेम दिखने पर प्रशंसा का ठप्पा लगाने मे देर नही करते लेकिन दोनो यानि पति पत्नी का आपस मे प्रेम दिखे तो सब और खलबली मच जाती और ना जाने कितने कटु शब्दों की बौछार होती हैं ।मौका मिलते ही पति पत्नी मे झगड़ा करवाने का भी कोई अवसर नही छोड़ते ।स्थिती यहॉ तक आती कि पति अपने घर वाले को ही सही मानते व पत्नी अकेली पड़ जाती और हार जाता दंपति का प्रेम । ढह जाते सारे सपने ।शुरू हो जाता रोज़ के लड़ाई झगड़े और किचकिच का दौर । धीरे धीरे दूरियाँ इतनी बढ़ जाती है कि उनको पाटना मुश्किल हो जाता और पहले का ख़ुशनुमा जीवन सिर्फ़ यादगार ही बन जाता हैं ।एक अजीब सी ख़ामोशी आ जाती रिश्तों मे ।

पत्नी की ये सारी बाते सुनकर पति याद करके बोला कि हॉ यही तो हुआ था दोनो के बीच । 

आगे क्या हुआ ज़िक्र किया तो पाया कि आपस मे सँभलने से ही पहले ही डॉ नया मेहमान की ख़ुशख़बरी देती है और धीरे से बच्चे के आने की आहट होती है और वर्ष भर में पालना झूलने लगता है ।

सारा ध्यान अब बच्चे पर हो जाता है ।हर समय उसका खाना पीना , उठना बैठना , शु शु पाॅटी , उसके खिलौने, कपड़े और सैर कराना ।ऐसे ही समय कैसे फटाफट निकल जाता है । इसी दौरान दूसरे बच्चे की तैयारी होने लगी ।फिर पालना झूलने लगा ।

आपस की खाई और बढ़ जाती है व इस दौरान पति पत्नी दोनो का आपस में बातें करना , घूमना फिरना कब बंद हो गया ,दोनों को ही पता ही नहीं चला ।

इसी तरह हर सुबह होती गयी और बच्चा बड़ा होता गया ।पत्नी बच्चे में व्यस्त होती गई और पति अपने काम में जैसे घर की किश्त ,गाड़ी की किश्त,घर खर्च और बच्चे की पढ़ाई लिखाई की ज़िम्मेदारी मे । साथ ही बैंक में शून्य बढ़ाने का टेंशन ।पति पूरी तरह से अपने आप को काम में झोंक देता हैं ।

बच्चो का स्कूल में एॅडमिशन हुआ और बड़े होने लगे । पति पत्नी का पूरा समय बच्चे की ज़रूरतों के साथ बीतने लगा. 
इतने में उम्र पैतीस की हो गयी ।खुद का घर,गाड़ी और साथ मे बैंक में कई सारे शून्य इकट्ठे हो गये । फिर भी ना जाने लगता कि कुछ अधूरा है ।

धीरे धीरे दोनो की चिढ़ चिढ़ बढ़ती गई और साथ मे उदासीनता । धार्मिक जगह पर भी वक्त बिताने लगे ,पूजा मे भी मन लगाना शुरू किया ।मित्रों के साथ भी रहते । लेकिन दिल के कोने मे कुछ अधूरा हैं पर वो क्या है यह समझ में नहीं आया ।  लेकिन कभी भी कारण सोचने मे समय नही दिया ।  

दिन पर दिन बीतते गए , बच्चे बड़े होते गये और उनका खुद का एक संसार तैयार हो गया। तब तक दोनों ही चालीस बयालीस के हो गए । बैंक में शून्य बढ़ता ही गया ।पति का पैसे कमाने का टेंशन तो पत्नी को घर के ढेर सारे काम का टेंशन व साथ मे ऐसे समाज का टेंशन जो न तो ख़ुद जीता है न औरो को जीने देता है । लगता मशीन की तरह जिंदगी चल रही हैं । ना कोई खुशी ना कोई उमंग । 

और फिर आता है पचासवॉ साल ,आंखों पर चश्मा लग गया बालो मे सफ़ेदी आने लगी दिमाग में और उलझनें बढ़नी शुरू हो गई । 

बेटा बेटी अब काॅलेज में है  ।बैंक में शून्य बढ़ रहे हैं। वक्त के साथ बेटे बेटी का कॉलेज खत्म हो गया । दोनो अपने पैरों पर खड़े हो गये ।अब दोनो नौकरी पर जाने लगे ।बेटा शहर में नौकरी करने लगा।बेटी के नौकरी के दौरान ही हाथ पीले कर दिये ।

उम्र पचपन के बाद साठ की ओर बढ़ने लगी ।बैंक में अब कितने शून्य हो गए, कुछ खबर नहीं है।

शारीरिक दुर्बलता से बाहर आने जाने के कार्यक्रम अपने आप बंद होने लगे ।गोली,दवाइयों के दिन शुरू होने लगे ।डाॅक्टरों की तारीखें भी तय होने लगीं। 

बच्चो के भविष्य का सोचकर लिया गया घर भी अब बोझ लगने लगा । 

ये सब आपस मे बाते करते करते ना जाने कितना वक्त गुज़र गया और भी गुज़र जाता यदि एकाएक फ़ोन की घंटी की आवाज़ ना सुनाई पड़ती । फ़ोन की आवाज़ सुनकर दोनो वापस वर्तमान मे लौटे । पति ने लपक कर फोन उठाया और पत्नी पूजा करने चली गई। बेटा का फ़ोन था। बेटा अपनी शादी की जानकारी देकर बताता है कि अब वह शहर मे ही रहेगा।

 एकाएक इन बातों पर विश्वास नही हुऑ । वह शहर में ही घर लेकर बस गया । बेटे से अपनी सम्पति,गाड़ी ,बंगला बैंक के बारे मे पूछने पर बोला कि वह सारे रूपये उसके नाम के कर दे क्योंकि हम दोनो को कभी भी कुछ भी हो सकता है। ऐसे शब्द सुनकर झटका सा लगा और अपने आप को किसी तरह संभाला । 

अब पति को रिश्तों की ख़ामोशियों,बढ़ती दूरियों व उदासीनता का जवाब मिल गया क्योकि सभी रिश्तों की हकीकत समझ आ चुकी ।चाहे कोई भी रिश्ता हो ,चाहे जितने भी रिश्तों हो लेकिन सबसे अंत मे एक ही रिश्ता जो दोनो को एक दूसरे को सम्भालता है वह पति पत्नी का रिश्ता । मन पछता रहा था क्यों नही जिये ख़ुद के लिये ।?पत्नी को हमेशा ग़लत ही क्यों समझा । जिसकी बातों पर यक़ीन किया वह सभी रिश्ते सम्बंधी कहॉ गये । काश उस समय समझ पाता तो आपस मे इतनी दूरियाँ ना होती ना खो जाते जिंदगी के वो सुनहरे पल । लेकिन कहावत हैं ना “जागो तभी सवेरा “….

ये सब सोच मे आती ही लगा कि मन को सुकुन मिल गया । हॉ इतने सालों से इसी की तलाश तो थी।

पति पुनः सोफे पर आ कर बैठ गया। पत्नी की भी पूजा खत्म होने आई थी। पति ने  उसे आवाज़ दी चलो आज फिर हाथों में हाथ ले कर सैर करें ।

पत्नी तुरंत बोली बस अभी आई पति को विश्वास नहीं हुआ । चेहरा खुशी से चमक उठा,आंखें भर आईं । पत्नी की आंखों से आँसू गिरने लगे और गाल भीग गए,मेरे पास आ कर बैठ गई और कहा बोलो क्या बोल रहे थे पर पति ने कुछ नहीं कहा । पति एकटक पत्नी को देख रहा था ।

क्षण भर को पत्नी शून्य हो गई, क्या करूं उसे समझ में नहीं आया ।लेकिन एक-दो मिनट में ही पत्नी चैतन्य हो गई, धीरे से उठी और पूजाघर में गई । एक अगरबत्ती जलाई और ईश्वर को प्रणाम किया और फिर से सोफे पर आकर बैठ गई ।
और कहा चलो कहां सैर जाना है और क्या बातें करनी हैं । तुम्ही बोलो ऐसा कहते हुए पति की आँखें भर आईं । वो एकटक उसे देखती रही , आंखों से अश्रुधारा बह निकली ।

पत्नी का सिर पति के कंधों पर गिर गया । ठंडी हवा का धीमा झोंका अभी भी चल रहा था । दोनो हाथो मे हाथ डाले चले गये किसी समुद्र के किनारे ।

यही तो होता आया है हम सबकी जिंदगी मे …

 एक सुकुन की तलाश मे ना जाने कितनी बेचैनियां पाल ली,

फिर भी जाने सभी क्यूँ कहते है कि हम बडे हो गए हमने जिंदगी जीना सीख ली। 

शादी एक पवित्र बंधन है उसे पूर्ण निष्ठा ,विश्वास के साथ निभाओ । इस रिश्तों को सबके सामने सम्मान देते हुये कभी  नही हिचकिचाये चाहे किसी को पसंद हो या ना हो ।एक बात का जरूर ध्यान रखना कि एक लडकी अपना सबकुछ छोड़कर आपके भरोसे से ही पूरी जिंदगी आपके घर को अपनाती हैं उस भरोसे को हमेशा बनाये रखना ।साथ मे एक लड़का भी पूरे विश्वास से अपना पूरा घर लडकी को सुपुर्द कर देता है तो उसके सम्मान को भी बनाये रखना । 

सभी दंपतियो को समर्पित….

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

लिखने मे गलती हो तो क्षमाप्रार्थी🙏🙏

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