नेकी कर दरिया मे डाल…… 

सभी धर्मों में नेकी (पुण्य) को एक अहम माना है । दुनिया के सभी धर्मों में किसी गरीब की तन , मन , धन से मदद करना ही दान है। मनुष्य को चाहिए कि वह सत्य,ईमानदारी व इन्साफ़ का दामन कभी न छोड़े, जहाँ तक हो सके नेक काम करे। नेकी एक तरह की कल्याणकारी और दान से सम्बंध रखती हैं जिस तरह कोई चीज़ यदि दरिया में डाल दी जाती है तो उसे भुला दिया जाता है, उसी तरह दूसरों के प्रति मित्रभाव से कोई काम करके भूला दिया जाना ही नेकी होता हैं । जैसे कि इस कहानी से ज़ाहिर होता हैं …..
एक काफिला सफ़र के दौरान अँधेरी सुरंग से गुजर रहा था । उनके पैरों में कंकरिया चुभी, कुछ लोगों ने इस ख्याल से कि किसी और को ना चुभ जाये, नेकी की खातिर उठाकर जेब में रख ली । कुछ ने ज्यादा उठाई कुछ ने कम । जब अँधेरी सुरंग से बाहर आये तो देखा वो हीरे थे। जिन्होंने कम उठाये वो पछताए कि ज्यादा क्यों नहीं उठाए । जिन्होंने नहीं उठाए वो और पछताए । दुनिया में जिन्दगी की मिसाल इस अँधेरी सुरंग जैसी है और नेकी यहाँ कंकरियों की तरह है । इस जिंदगी में जो नेकी की,वो आखिर में हीरे की तरह कीमती होगी और इन्सान तरसेगा कि और ज्यादा नेकी क्यों ना की।
अक्सर लोग ये सोचकर दूसरों की मदद नहीं करते हैं कि इससे उनका क्या फायदा होगा ।लेकिन उनको ये पता नही कि प्रकृति भी उनकी सहायता करती है जो हमेशा दूसरों की बिना स्वार्थ के मदद करते हैं|हमेशा ऐसे लोगों की मदद जरुर करनी चाहिये जो मुसीबत में हों,क्या पता अगला संकट आप पर ही आ जाए|जैसे कि इस कहानी मे बताया गया हैं …..
एक नदी के किनारे एक पेड़ था| उस पेड़ की शाखा पर एक चिड़िया बैठी थी और वह पेड़ पर बैठकर नदी की तरह देख रहा थी कि अचानक उसने देखा कि नदी के पानी में एक बिच्छु बह रहा है,जो कि पानी से बाहर निकलने की बार-बार कोशिश कर रहा था ,लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण वह नदी से बाहर आने में असमर्थ हो रहा था ।
बिच्छु को देखकर चिड़िया को ऐसा लग रहा था कि वह कुछ ही समय में मर जाएगा ।यह सब देखकर चिडिया को दया आ गयी और उसने बिच्छु को बचाने की ठानी| उसने अपनी चोंच से एक पत्ता तोड़कर पानी में गिराया तो बिच्छु उस पत्ते पर बैठ गया और पानी से बाहर आकर चिड़िया को धन्यवाद कहा
तभी अचानक उसी समय एक शिकारी वहां आया और चिडिया को पकड़ने के लिए पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया| चिड़िया उस शिकारी को देख नहीं पा रही थी । शिकारी चिड़िया को पकड़ने के लिए धीरे-धीरे अपना बांस ऊपर बढाने लगा लेकिन बिच्छु ने उस शिकारी को देख लिया और वह पेड़ की ओर दोड़ पड़ा चुँकि बिच्छु बोल नही सकता इसलिए वह शिकारी के पास जाकर उसके पैर पर चढ़ गया और उसका पैर पूरी जोर से काट लिया| बिच्छु के तेज़ डंक से शिकारी तेज़ चिल्लाया| उसकी आवाज़ सुनकर चिड़िया ने भी उस शिकारी को देख लिया और वहां से उड़ गयी । इस तरह दोनों प्राणियों की जान बच गयी ।
 हिन्दी की एक प्रसिद्ध कहावत है “नेकी कर दरिया में डाल” जिस का अर्थ है ‘भला करो और करके भूल जाओ’। क्योंकि अगर दिल में रखा तो दिल टूट जाएगा । 
नेकी करने वाला इंसान का हृदय प्रसन्न और संतुष्ट रहता है।समाज में ऐसे व्यक्तियो को लोगों का सम्मान , प्रेम और सहानुभूति प्राप्त होती है ।
जय सच्चिदानंद 🙏🙏
लिखने मे गलती हो तो क्षमाप्रार्थी🙏🙏

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