जिंदगी बिकाऊँ नही….

 पैसे से सांसारिक सुख और भौतिक सुविधाये खरीदी जा सकती है लेकिन सच्ची ख़ुशी नहीं खरीद सकते ।हमे समय रहते यह विचार करना चाहिये कि हमारी जिंदगी का मकसद क्या है? क्योकि ज़िंदगी में ज्यादा से ज्यादा भौतिक चीज़ें पाने की चाहत में हम इस कदर खो गये है कि ज्यादा अहमियत रखने वाली चीजे को याद रखना भूल गये जो कि पैसों से नहीं खरीदी जा सकतीं। पैसों की ज़रूरत के साथ दूसरों की सहायता करना,दयालुता,करूणा भाव ……धार्मिक व आध्यात्मिक मार्ग मे कैसे उन्नति करे इस पर भी सोचना चाहिये।

माना कि आज की दुनिया में पैसे का बहुत महत्व है और पैसे के दम पर बहुत सारी चीज़ें की जा सकती है ।लेकिन ये भी सच बात है कि सबकुछ पैसों से भी नही खरीद नही सकते जैसे कि किसी की योग्यता,विश्वास,सम्मान,सच्ची ख़ुशी …

हम पैसों से योग्य व्यक्ति को खरीद सकते है लेकिन उसकी कला,योग्यता या हुनर को नहीं । इसी तरह यदि विश्वास टूट जाए तो वह पैसों से नही ख़रीद सकते । पैसो से सम्मान नही खरीद सकते । क्योकि सम्मान पैसेवाले का नहीं उसके पैसे का सम्मान होता है ।इसी तरह सम्मान हमारा नही हमारे काम का, योग्यता का और व्यवहार का  होता है ।

ज़िंदगी मे चाहे इंसान के पास बहुत कुछ हो, तो भी उसकी ज़िंदगी उसकी संपत्ति की बदौलत नहीं होती। पैसों से इंसान एक सैकंड भी नही खरीद सकते …जानिये इस कहानी से….

एक कंजूस व्यक्ति था ।उसकी नीयत हमेशा किस तरह पैसा बचाये यही रहती । वह हर जगह कंजूसी करता यहॉ तक कि जूते पहनने की जहॉ ज्यादा ज़रूरत पड़ती वहॉ ही पहनता ।इस तरह उसने जीवनभर कंजूसी कर करके लाखो रुपये एकत्रित कर लिए। अब उसने सोचा कि इस धन को बैंक मे जमा कराके उसके ब्याज के ज़रिये वह एक साल तक बिना कोई काम किये आराम की नींद सोयेगा। इसके पहले की वह उस धन को जमा करा पाता, यमदूत उसको लेने आ गया।
उसने यमदूत से कुछ समय देने की प्रार्थना की। वह गिड़गिड़ाने लगा कि उसे अभी और जिंदगी जीना हैं पैसे का उपभोग करना हैं अपनी ख़्वाहिशें पूरी करनी हैं जो आज तक उसने नही की परन्तु यमदूत अड़ा रहा। ट्स से मस नही हुआ।

फिर व्यक्ति ने भीख मॉगी कि मुझे सिर्फ सात दिन की जिंदगी दे दो , मैं तुम्हे अपना आधा धन दे दूंगा। पर यमदूत ने उसकी बात पर कोई ध्यान नही दिया।

उस व्यक्ति ने यमदूत से कहा कि ज्यादा नही तो मैं आपसे एक दिन की जिंदगी की भीख मांगता हूँ । इसके बदले आप मेरी पूरी जिंदगी मेंहनत से इकट्ठा गया पूरा धन ले लीजिये।

यमदूत फिर भी नही माना ।तमाम प्राथनाओ के बाद भी उस व्यक्ति की बात यमदूत ने नही मानी ।तब बिना समय गँवाये उस व्यक्ति ने अपनी बात को एक संदेश के रूप मे लोगो को लिखा कि जीवनभर सिर्फ सम्पत्ति जोड़ने में ना रहो बल्कि जिंदगी का हर एक पल पूरी तरह से खुलकर जियो। मैने पूरी जिंदगी लाखो रुपये जमा करने मे लगा दिये लेकिन वही जमापूँजी आज मेरे लिए एक सेकंड का समय नही खरीद सकी ।यह शाश्वत सत्य हैं कि अंत में पैसा साथ नहीं जाता हमारा कर्म साथ जाता है यहॉ तक कि हमारी देह भी साथ नही जाती है और मिट्टी बन जाती हैं।

इस कहानी कहने का अभिप्राय यह है कि यदि हम पूरी जिंदगी पर नजर डाले तो महसूस होगा कि हमने क्या खोया क्या पाया । जिस भौतिक दौलत को पाने के पीछे हमने अपनी पूरी जिंदगी लुटा दी वह अंत समय मे काम न आई और जो दौलत (आत्मा का सुख )अंत समय तक भी साथ देती उसको पाने का कभी भी प्रयास नही किया

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