बेटियॉ कब बड़ी हो जाती है ….

बेटियॉ देखते देखते कब बड़ी हो जाती है तथा एक दिन चिड़िया की तरह घर से उड़ जाती है । जब बेटी की घर से विदाई होती हैं तो विदाई के समय बोलती हैं । मॉ,पापा आपने खूब प्यार दिया, पर शादी करवा के पराया कर दिया ।  मानो वह ऑखो ही ऑखो से यह प्रश्न करती है……

“छोटी सी उमर में परनाई रे बाबा सा 
काइ थारो करयो में कसूर

कितना दिना तो म्हाने लाड लड़ाया

अब क्यो करो थे म्हाने दूर”

यह राजस्थानी गाना सुनते ही बरबस ऑखो मे पानी भर आता है ।

समाज का दस्तूर ही ऐसा है कि बेटियॉ को घर से विदा लेना ही पड़ता है । पर मायके मे अपनी कुछ यादें छोड़ जाती है ….

बेटियॉ देखते देखते कब बड़ी हो जाती है 

एक दिन चिड़िया की तरह घर से उड़ जाती है ।

ये बात तब समझ मे आती हैं 

जब बेटियाँ चावल उछाल बिना पलटे

महावर लगे कदमों से विदा हो जाती हैं ।

कवर पर अपना नाम लिखी किताबें 

छोड़ जाती है अलमारी मे ।

दीवार पर टंगी खूबसूरत ऑयल पेंटिंग की तस्वीरें 

जिसके एक कोने पर लिखा हुआ अपना नाम

खामोशी से कुछ एहसासों की निशानियां छोड़ जाती है 

जब बेटियाँ विदा हो जाती हैं ।

रसोई में नित नए फैशन की वस्तुये लाना

अपने पसंद से बैठक की सुंदर सजावट करना

अलमारी में ऑल्ड फैशन की ड्रेसे छोड़ 

तमाम नयी खरीदारी सूटकेस में ले

मन आँगन की तुलसी में दबा जाती हैं 

जब बेटियाँ विदा हो जाती हैं ।

सूने सूने कमरों में उनका स्पर्श

पूजा घर की रंगोली में उंगलियों की महक

सूनी दीवारों पर बचपन की यादें 

घर आँगन अश्रुभरित आँखों से निहारकर

महावर लगे पैरों से दहलीज़ लांघ जाती है

जब बेटियाँ चावल उछाल विदा हो जाती हैं ।

एल्बम में सुंदर सुंदर तस्वीरें 

कुछ धूल लगे मैडल और कप 

आँगन में गुलाब क्यारियाँ की निशानी

गुड़ियों को पहनाकर एक साड़ी पुरानी

उदास खिलौने टोकरी में औंधे मुँह लुढ़के,

घर भर में सन्नाटा घोल जाती हैं 

जब बेटियॉ चावल उछाल विदा हो जाती हैं ।

सारा बचपन मन मन्दिर के कोने मे दबा

जिम्मेदारी की चुनर ओढ़ चली जाती हैं 

जब बेटियाँ चावल उछाल बिना पलटे विदा हो जाती हैं ।

बेटियॉ मॉ पापा की जान और शान होती हैं । वह दुनिया भर की ख़ुशियाँ देने की कोशिश करती हैं । वह कभी भी अपने परिवार का नाक नही कटने देती हैं ।शादी से पहले घर की शान तो बाद मे दुनिया की शान बन जाती हैं ।

बेटियॉ को औलाद की तरह नहीं फौलाद की तरह पालो |
लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏 

2 Comments Add yours

  1. शिखा says:

    बहुत सुंदर भाव पूर्ण कविता है।

    Liked by 1 person

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