अनुभव-भावनाओं के अहसास का….

ऐसा कहा जाता है कि “हमेशा अच्छी वाणी बोलिये “क्योकि पूरे दिन मे बोली गई कोई भी वाणी सच हो सकती है । अच्छी भावनायें रखने पर वाणी सहज रूप से अच्छी निकलेगी । 

यह क़ुदरत का नियम है कि जब भी हम कोई तीव्र भावना करते है तो प्रकृति संजोग मिलने पर उसे पूरा करने मे सहयोग देती है। जिंदगी मे ऐसे कई अनुभव है जहॉ तीव्र रूप से की गई भावनायें साकार हो गई ।आप सबसे मै उसी संदर्भ मे अपना एक अनुभव शेयर करना चाहूँगी कि हमारी जिंदगी मे तीव्र रूप से की गई भावना किस तरह से भविष्य मे क्रियान्वित होती है 

मेरे सभी मित्र ऐसे है जो जो भौतिक तथा आध्यात्मिकता की दुनिया दोनो मे रूचि रखते है । सभी मित्रगण ने मिलकर एक नियम बना रखा था कि हर रोज सभी जने दिल से कोई भी एक अच्छी भावना पूरे दिन के लिये करे । 

एक दिन हम सब मित्रों ने मिलकर छुट्टी के दिन बाहर कही पिकनिक पर जाने का प्रोग्राम बनाया । उस दिन हमने “दुनिया मे कोई भी प्राणी” भूखा न रहे ऐसी भावना की थी । 

सब मिलकर क़रीबन 70-80 लोग थे ।गर्मी ज्यादा होने की वजह से ए.सी.वाला हॉल पूरे दिन के लिये किराये पर ले लिया गया ।

उस दिन सुबह हम सब घर से नाश्ता करके निकले थे ।साथ मे हम सब लोग लंच के लिये घर से एक एक आईटम बना कर ले आये ।खाने मे तरह तरह की वैरायटी हो गई । डिनर का बाहर से ही इंतज़ाम कर दिया गया ।हॉल काफी बड़ा था । वहॉ हम सबने खूब मजे किये ,गेम खेले,नाच गाना किया और भी बहुत सारी एक्टिविटिस की । 

दोपहर को लंच के लिये सबने अपने अपने खाने का सामान निकाला और मिलकर लंच किया । लंच करने के बाद सबका क़रीब क़रीब आधा खाना बच गया ।  सिक्योरिटी और वहॉ अन्य कुछ व्यक्ति को भी खाना खिलाया उसके बावजूद  भी काफी मात्रा मे खाना बचा था । खाना बाहर फैंकने का किसी का भी मन नही था । अब क्या करे ? सिक्योरिटी वाले से बात करते करते बातो ही बातो मे मालूम चला कि पास मे ही एक लेबर कैंप है जहॉ पर मजदूरो को पर्याप्त मात्रा मे भोजन भी नसीब नही होता । यहॉ तक कि किसी किसी मजदूर को तो सिर्फ एक बार ही चाय नाश्ता से पूरा दिन व्यतीत करना पड़ता है ।

तभी एकाएक मन मे विचार आया कि क्यों ना सारा बचा हुआ खाना इन सभी मज़दूरों को पहुचॉ दिया जाये ।फटाफट कुछ मित्रों ने सारा खाना इकट्ठा करके डिब्बे मे पैक किया और लेबर कैंप लेकर पहुँच गये ।वहॉ बेचारे बहुत ही भूखे प्यासे मज़दूर बैठे थे ,जैसे ही खाना देखा तो बहुत ही खुश हो गये । इतना वैरायटी वाला खाना कभी भी नही खाया था । उनकी ऐसी मुस्कान देखकर ही मन प्रसन्न हो गया तथा साथ मे इस बात की भी सबसे ज्यादा खुशी हुई कि हमने जो दिन भर के लिये भावना की थी कि आज कोई भी जीव भूखा ना रहे वह भावना हमारे ही आसपास के क्षैत्र मे काम आ गई ।
ये सब बताने का कारण ये है कि हम जो भी तीव्र भावना करते है उस वाईब्रेशन के परमाणु प्रकृति मे हर जगह फैल जाते है तथा जैसे ही संजोग बनता हे उसको प्रकृति पूरा करने मे सहयोग करती है । अच्छी या बुरी कोई भी भावना जो पूरे दिल से की जाती है रिटर्न मे प्रकृति वही लौटाती है । 

इसलिये बोला जाता है कि अच्छे भाव करो । 

हम अपनी जिंदगी मे दुख का रोना ज्यादा रोते है । इसलिये हर समय यही लगता कि हमारी जिंदगी सुखो से ज्यादा दुखो से भरी है क्योकि जाने अंजाने मे हम कई बार भावो से दुखो को आमंत्रण दे देते है । यदि इसकी जगह हम ख़ुशियों वाली बाते सोचे व उसे करने का भाव करे तो देखेंगे कि हमारे आसपास चारों तरफ ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ मँडरा रही है ।

कई बार हम बच्चो या किसी भी परिचित के सामने पुराने या नये समय के दुख का पिटारा खोल देते है और कहने की कोशिश करते है कि हमने कितनी परेशानी वाली जिंदगी जी है ।

जैसे कि हम बच्चो से ये बोलते है कि शुरू के दिनो मे हमारे पास पैसे की कमी थी और बहुत कम सुख सुविधा थी इसलिये हमने बहुत परेशानी और दुख देखकर तुमको बड़ा किया ।अपनी कई इच्छाओं का त्याग किया तब जाकर तुम आज इस लायक बने । हम इस प्रकार से अपनी दुखभरी व्यथा सुनाते कि हमारे हर वाक्य मे दुख ही दुख झलकता और अंजाने मे ही सही हम अपने चारों और दुख के परमाणु इकट्ठा कर लेते है ।परिणामस्वरूप हर समय दुख का ही ख़्याल ही ज्यादा हावी रहता मन और मस्तिष्क पर । इसके विपरीत यदि इसी बात को अलग ढंग से बोले जैसे कि हमारे पास कम पैसे तथा कम सुख सुविधा होते हुये भी बहुत ख़ुशियों के पल जीये उन पलो के साथ तुम कैसे बडे हो गये और इस लायक बन गये हमे भी मालूम नही चला । दुख आये लेकिन उसको हमने अपने ऊपर कभी भी हावी होने ही नही दिया । देखना कि इस तरह बोलने से हमारे खुशी के वाईब्रेशन चारों और फैल जायेंगे और। खुशी ही खुशी का अनुभव होगा व मन आनंदित रहेगा ।

हम जो देंगे वही लौटकर हमारे पास आयेगा 

एक्शन = रिएक्शन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏👍
जय सच्चिदानंद 🙏🙏 
 

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