सृष्टि की हर लीला है निराली …..

सृष्टि हर रूप मे बहुत शक्तिशाली है । यह हमारा पालन पोषण करने की क्षमता रखती है तो विनाश करने की भी शक्ति रखती है। दरअसल इसकी हर लीला ही निराली है जिसको कोई भी नही जान सका ।

ईश्वर ने सृष्टि की संरचना के समय कुछ ऐसी बाते ध्यान रखी जो चिंतन योग्य है व इनसे हम कई महत्वपूर्ण पाठ सीख सकते है जैसे कि ……

1.यदि अनाज को लंबे समय तक संग्रह करके रखा जाये तो अनाज में अपने आप कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं । ऐसी क्षमता प्रकृति ने दी हैं ।

 वरना लोग इसका सोने और चाँदी की तरह संग्रह करके रख लेते ।

किसी भी वस्तु का लम्बे समय तक संग्रह न करने के साथ लालच ना करने का पाठ पढ़ाती है ।

2. पतझड़ के मौसम मे सिर्फ पतो का ही झड़ना होता है लेकिन पेड का अंत नही । प्रकृति ने ऐसी व्यवस्था की है कि कुछ समय के बाद फिर नये पते आने की शुरूआत होती है । यदि ऐसा नही होता तो पेड ही नही बचते ।

ऐसा होने से हम यह सीख सकते है कि इंसान कभी भी निराश न हो । हमेशा उम्मीदे जिंदा रखे ।

3. इंसानो को अपने परिजनों से बहुत राग होता है इसलिये मृत्यु के बाद प्रकृति ने देह में दुर्गन्ध उत्पन्न कर दी । वरना कोई अपने प्रियजनो को कभी भी न जलाता या ना दफ़न करता।

ऐसा होने से हम यह सीख सकते है कि चाहे कितना भी राग हो लेकिन ज़िंदा रहने तक ही क़ायम रहता है । प्रकृति हमे मोह से बाहर निकलने का पाठ पढ़ाती है ।

4. प्रकृति बिना भेदभाव या पक्षपात से सबको एक समान देती है ।जैसे कि नदी अपना जल स्वयं नहीं पीती लेकिन सबकी प्यास बुझाती ,पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते लेकिन सबको देते हैं ।इसी तरह फूल सबके लिये खुशबू बिखरते है .. …..लेकिन प्रकृति के साथ अनावश्यक खिलवाड़ होने पर सूखा, बाढ़, सैलाब, तूफान भी लाने की भी क्षमता रखती है।

यानि प्रकृति देने का काम कर सकती है तो लेने का भी कार्य कर सकती हैं ।

इसके माध्यम से प्रकृति हमे निस्वार्थता का पाठ सिखाती हैं व साथ मे यह संदेश भी देती है कि हम जो देंगे वही लौट कर हमारे पास आयेगा ।

5. प्रकृति ने जीवन में किसी भी प्रकार के संकट या अनहोनी के साथ धैर्य और साहस की शक्ति दी वरना जीवन में निराशा और अंधकार ही रह जाता, कभी भी आशा, प्रसन्नता से जीने की इच्छा नही होती ।

प्रकृति हमे यह जताती है कि दुख के बाद सुख जरूर आयेगा कोई भी दुख या संकट ज्यादा समय के लिये नही टिकेगा ।

6. प्रकृति ने इंसान को भयंकर से भयंकर दुख सहने व भूलने की शक्ति दी है वरना इंसान अपने दुखो को आजीवन याद कर करके पूरी जिंदगी खराब कर देता ।

7. जीवन मे संतुलन बनाये रखने के लिये प्रकृति ने जिंदगी के तराज़ू मे सुख और दुख रूपी दो पलड़े दिये है जिसमे कभी कोई पलड़ा हल्का तो कभी कोई भारी या कभी दोनो बराबर । वरना इंसान कभी नॉर्मल जीवन जी नही पाता ।       

8.प्रकृति ने धरती पर जीवों का संतुलन बनाये रखने के लिये शाकाहारी व माँसाहारी दोनो जीवों की उत्पत्ति की है वरना पूरी धरती जीव जंतुओं से भर जाती ।

सबसे महत्वपूर्ण चौरासी लाख जीव योनियो की भटकन के बाद इंसान सुख दुख का अनुभव करते करते इतना थक जाता है कि वह संसार के परिभ्रमण से छुटकारा पाने के लिये मुक्ति का मार्ग खोजना शुरू करता है और प्रकृति उसे पूरा करने मे सहयोग देती है और ऐसे मार्ग बताने वाले गुरू से मिलवाती है 

इस तरह प्रकृति बंधन से मुक्ति पाने तक सहयोग देती रहती हैं ।

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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