सच्ची घटना (सेवा भाव)….

सच्ची घटना (सेवा भाव)….

गर्मी का मौसम था । भरी दोपहर मे हमारे घर की कुछ दूरी पर तपती सड़क पर एक बूढ़ी औरत सिर पर कुछ सामान की पोटली उठाये जा रही थी ।

बुढ़ापा , उस पर झुलसा देने वाली गर्मी एवं दुर्बल शरीर ,इन सबने उस बेचारी को थका दिया वह पसीने से तरबतर हो रही थी ।

थोड़ी देर बाद जब वह चल पाने मे असमर्थ महसूस कर रही थी तो भरी धूप मे ही एक स्थान पर निसहाय होकर बैठ गई । वहॉ से काफी लोग आ जा रहे थे लेकिन किसी ने भी उस बूढ़ी अम्माँ की तरफ ध्यान नही दिया ।

थोड़ी देर बाद देखा कि एक भईया (सहेली का भाई)जो वहॉ से गुजर रहा था , उसने देखा कि उस बूढ़ी अम्माँ के आगे एक पोटली रखी है लेकिन उठा पाने मे असमर्थ होने की वजह से बैठी है । तो वह तुरंत उस अम्माँ के पास गया और बोला मॉ जी आपका घर किधर है , मैं यह सामान वहॉ तक पहुँचा देता हूँ ।

वह बहुत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद देने लगी और घर का रास्ता बताया । उस भईया ने वह सामान वहॉ पहुचॉ दिया ।

इतना ही नही ,उसने जब बूढ़ी अम्माँ के दुर्बल शरीर व उसके घर की हालत देखी तो वह द्रवित हो गया और हर थोड़े दिनो मे उसके यहॉ खाने की सामग्री देने स्वयं जाने लगा ।

आज के स्वप्रधान युग मे मनुष्य परमार्थ भावना से जिस गति से दूर जा रहे है । यह सच्ची घटना सच्ची मानवता का संदेश देती है कि असहायो की निस्वार्थता से सेवा करना ही सच्चा धर्म है ।

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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