गुरु कौन…..?

मैने एक आदमी से पूछा कि गुरू कौन है व उनका हमारी जिंदगी मे क्या स्थान है । उस  व्यक्ति के हाथ मे काफी आम थे । उसने एक आम मेरे हाथ मैं देकर पूछा,इसमें कितने बीज  (गुठली) हें,बता सकते हो ?मैने कहा एक बीज हैं । उसने फिर पूछा ,इस बीज में कितने आम हैं यह भी सोचकर बताओ?मैं सोचकर बोला कि एक बीज से एक पेड़, एक पेड़ से अनेक आम अनेक आम में फिर अनेक बीज ,हर बीज से फिर एक एक पेड़ !! और यही बिना रूके क्रम चलता रहता है 

 वो मुस्कुराते हुए बोले इसी मे तुम्हारा जवाब छुपा है ।हमें ईश्वर पाने के लिये भक्ति और ज्ञानरूपी बीज अपने मन में लगा लेने की ज़रूरत है फिर इसी क्रम से परमात्मा की कृपा हमें प्राप्त होती रहती है ।

यह बीजरोपण गुरू सिखलाता है । गुरू हमे परमात्मा तक जाने का रास्ता दिखाता है ।

 गुरू एक ऐसी शक्ति या प्रकाश है जिनके आते ही, सारे संदेह के बादल खत्म हो जाते हैं । 

गुरू वो ज्ञान हैं जो हमे परमात्मा से मिलन करवा सकता है  । 

गुरू हमे भवसागर से पार करवाने के योग्य बनाता है । 

गुरू वो है जो प्राणो मे नीर बनकर बहते है ।

गुरू वो सत चित आनंद है जो हमारी पहचान करवाता है ।

गुरू वो अमृत प्याला है जिसको पीकर कोई भी प्यासा नही रहता है ।

गुरू कृपा वो है जो अनेकानेक कोटि पुण्यों से मिलती है ।

गुरू वो अनमोल खजाना है जो भक्ति भाव से मिलता है ।

गुरू वो प्रसाद है जिसके मिलने पर कुछ और की ज़रूरत नही रहती है ।

सच्चा गुरु हमारी बुराइयो को हटाने मे मदद करता है ।तथा अज्ञानता से ज्ञान की और लेकर आता हैं । 

मेरा स्वयं का अनुभव है कि गुरूजी से मिलने से पहले इतने मन मे प्रश्न उत्पन्न होते ,जिनका समाधान गुरूजी से लेना होता,लेकिन जैसे ही गुरूजी के प्रत्यक्ष दर्शन होते तो लगता कि प्रश्न पूछने की ज़रूरत ही नही,सारे समाधान मिल गये ।गुरूजी के दर्शन मात्र से ही मन मे इतना शांति का अनुभव महसूस होता जो बयान नही कर सकते । गुरू की महिमा ही ऐसी है जिसका बखान करे उतना ही कम है 

यदि गुरू को देना हैं हम अपनी बुराईयो को गुरु के चरणों मै अर्पित करे,और वचन दे कि आज से मै अपनी इस बुराई को हमेशा के लिये त्याग कर रहा हूँ ।

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

6 Comments Add yours

  1. 22मई जिंदगी की यादें पुराने गीत, गानों, तस्वीरों और कविताओं के साथ कहानी अपने जमाने की भाग 3और चार में।

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    1. आपका 22 मई का लेख पढ़ा बहुत अच्छा है उससे गुरू का भी ज़िक्र किया ।मेरा भी प्रथम गुरू मॉ को मानना है

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      1. धन्यवाद विमला जी।

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  2. आपने गुरु की बहुत ही अच्छा से वर्णन किया है। मैंने गुरु की महिमा का बखान अपने रचना में गीत के माध्यम से किया है पढिएगा आप को अच्छा लगेगा। ऐसा मुझे अभास हो रहा है।

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    1. धन्यवाद । जरूर पढ़ूँगी

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    2. आपने कौनसे महीने मे लिखी ? मिल नही रही हैं ।

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