तरह तरह के आभूषण पहनने के पीछे वैज्ञानिक कारण ……

 महिला का श्रृंगार माथे की बिंदी से लेकर पांव में पहनी जाने वाली बिछिया तक होता है। इसमें हर एक चीज का अपना एक वैज्ञानिक महत्व है । इनको पहनने से शरीर पर सीधे रूप से सकारात्मक प्रभाव होता है।

हिंदू महिलाओं में मांग मे सिंदूर ,माथे पर बिंदी,अँगूठी ,हाथो में चूड़ियां,पैरों में पायजेब ,नाक में लौंग , गले में मंगलसूत्र… आदि पहनना कई लोगों को फैशन से ज्यादा अौर कुछ नहीं लगता होगा लेकिन सिंदूर, मंगलसूत्र,चूड़ियां,लौंग और पायजेब …..इन सबसे जुड़ा विज्ञान कम ही लोग जानते हैं ।वह क्या है ?आइए जानें…..

1. सिंदूर लगाने के पीछे क्या है विज्ञान ….

शादी के समय मांग मे सिंदूर भरा जाता है  व उसके बाद प्रतिदिन विवाहित हिंदू महिलाएं मांग में सिंदूर लगाती हैं। क्योकि यह स्थान अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इस जगह सिंदूर लगाने से दिमाग हमेशा सतर्क और सक्रिय रहता है।  सिंदूर में मरक्युरी होता है जो अकेली ऐसी धातु है जिससे शीतलता मिलती है और दिमाग तनावमुक्त रहता है। 

2. टीका पहनने से जुड़ा विज्ञान …….

मांग में टीका पहनने से मस्तिष्क सम्बन्धी क्रियाएँ नियंत्रित, संतुलित रहती हैं एवं मस्तिष्कीय विकार नष्ट होते हैं।

3. कुमकुम या बिंदी से जुड़ा विज्ञान….

“कुमकुम”हो या “बिंदी ” ये दोनो भौहों के बीच में लगाया जाता है। यह बिंदु अाज्ञा चक्र कहलाता है। जब भी गुस्सा आता है तो चेहरे पर तनाव आ जाता है । इस बिंदु पर कुमकुम या बिंदी लगाने से शांति मिलती है और दिमाग ठंडा रहता है। 

4. नाक और कान के आभूषण से जुड़ा विज्ञान …..

कानों में झुमके, बालियां आदि पहनना फैशन ही नहीं, बल्कि इसका शरीर पर एक्यूपंचर की तरह प्रभाव पड़ता है । मस्तिष्क के दोनों भागो को विद्युत से प्रभावशाली बनाने के लिये नाक और कान को छिदवा कर उसमें कोई भी धातु धारण करना चाहिये । कान मे कोई भी धातु धारण करने से मासिक धर्म नियमित होने मे मदद मिलती है । हिस्टीरिया व हर्निया रोग में लाभ कराता हैं ।  नाक छिदवाकर नथुनी या लौंग धारण करने से नासिका सम्बन्धी रोग जैसे कि श्वास संबंधी समस्या,सर्दी ,खांसी में राहत मिलती हैं।  

शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए सोने के ईयररिंग और ज्यादा ऊर्जा को कम करने के लिए चांदी के ईयररिंग्स पहनने की सलाह दी जाती है। 

5. कांच की चूड़ियां के पीछे जुड़ा विज्ञान …..

शादीशुदा महिलाओं का कांच की चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। कांच में सात्विक और चैतन्य अंश मुख्य होते हैं। इस वजह से चूड़ियों के आपस में खनखनाने से जो आवाज़ पैदा होती है वह नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाती है।

6. अँगूठी पहनने के पीछे जुड़ा विज्ञान …..

हर अंगुली मे अँगूठी का अलग अलग प्रभाव होता है । हाथ की सबसे छोटी अंगुली में अंगूठी पहनने से छाती के दर्द व घबराहट से रक्षा होती हैं । इसके अलावा ज्वर, कफ, दम आदि बीमारियों से राहत मिलती हैं।

7. मंगलसूत्र पहनने से जुड़ा विज्ञान …
मंगलसूत्र धारण करने से वह शरीर के जिस भाग को स्पर्श करता है उसकी वजह से रक्तचाप पर कंट्रोल रहता है।

8. पैरों में पायजेब पहनने से जुड़ा विज्ञान …..

चांदी की पायजेब पहनने से पीठ, एड़ी, घुटनों के दर्द और हिस्टीरिया आदि रोगों से राहत मिलती है। चांदी की पायल हमेशा पैरों से लगी रहती है जो स्त्रियों की हड्डियों के लिए काफी फ़ायदेमंद है। इससे उनके पैरों की हड्डी को मज़बूती मिलती है।

इसके अलावा पायल से उत्पन्न आवाज़ की तरंगें वातावरण से जब मिलती हैं तो वह स्त्री को नकारात्मक ऊर्जा से बचाती हैं। इसके साथ यह तरंगे पांव तले आने वाली पाताल की तरंगों को रोकती है। इसी प्रकार से पायजेब ना सिर्फ स्त्री के पांव की खूबसूरती को बढ़ाती है बल्कि साथ ही उसके आसपास एक सुरक्षा कवच भी बनाती है।

9. बिछियॉ पहनने के पीछे का विज्ञान ….

पैर की जिन उंगलियों में बिछियॉ पहनी जाती है उसका कनेक्शन गर्भाशय और दिल से है। इन्हें पहनने से महिला को गर्भधारण करने में आसानी होती है और मासिक धर्म भी नियमित रहता है। आमतौर पर बिछियॉ चांदी की होने की वजह से जमीन से जो ऊर्जा ग्रहण करती है वह पूरे शरीर तक पहुंचाती है जो स्त्री के भीतर ऊर्जा को उत्पन्न करती है। पायजेब की तरह ही चांदी की बिछिया भी स्त्री को हर प्रकार के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखती है।

अपनी धार्मिक संस्कारो, रीति रिवाजों व पहनावे को हर एक मॉ बाप वैज्ञानिक आधार से अपने बच्चो को जरूर समझाये ।

picture taken from google 

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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