गुस्से की दवा …..

एक स्त्री बहुत ग़ुस्सैल थी । बात बात पर ग़ुस्सा । आये दिन उसकी घर के किसी भी सदस्य से लड़ाई होती रहती।घर मे सर्वत्र अशांति । सभी परेशान हो गये ।वह महिला भी अपने ग़ुस्सैल स्वभाव की वजह से दुखी थी ।उनके घर के पास एक चिकित्सक पड़ोसी रहता था जो किसी भी प्रकार के रोगों का इलाज करने मे दक्ष था । एक दिन वह महिला उस चिकित्सक के पास गई और बोली कि अंकल मेरी समस्या हल करो ।मेरे ग़ुस्सैल स्वभाव के कारण घर मे आये दिन क्लेश होता रहता है ।लड़ाइयाँ भी हो जाती है ।मेरे कारण घर के सारे सदस्य परेशान रहते है । मेरा इलाज करे व ऐसी दवाई दे जिससे मेरा ग़ुस्सा शांत हो जाये ।
चिकित्सक ने कहा ,बेटी एक दवाई देता हूँ पर उसका पालन करना थोड़ा कठिन है लेकिन अगर तुम ध्यान से पालन करोगी तो तुम्हारा रोग शांत हो जायेगा । वह बोली अंकल जैसा आप कहे वैसा मैं करने को तैयार हूँ । वह अंदर गया और एक बोतल मे दवाई भर कर लाया और बोला कि जब भी तुम्हे ग़ुस्सा आये ये दवाई पी लेना लेकिन पन्द्रह मिनट तक इसे मुँह मे ही रखना पड़ेगा जिसे यह अच्छी तरह लार मे मिल जाये । इस बात का जरूर ध्यान रखना तभी यह काम करेगी ।यह बहुत कीमती दवा है पहले ही दिन अपना प्रभाव डाल देगी । वह महिला बहुत खुश होकर बोली कि अंकल मैं आपकी कही बात का जरूर ध्यान रखूँगी और अपने घर चली गई । रोज की तरह घर मे झगड़ा होना निश्चित था । ऐसा उस घर मे झगड़े का क्रम बना हुऑ था । जैसे ही झगड़े की शुरूआत हुई और वह गुस्से मे कुछ बोलने वाली ही थी कि उसे दवा का तुरंत ध्यान आ गया और जाकर दो घूँट मुँह मे दवा भर ली क्योकि उसे पंद्रह मिनट तक मुहँ मे लार से मिक्स करने के लिये रखना था । वह चाहकर भी नही बोल पा रही थी । उसे अंकल चिकित्सक की आज्ञा का पालन करना था । वह मौन रही । पॉच सात मिनट बाद सामने वाला इंसान भी चिल्लाकर चुप हो गया क्योकि कहा जाता है कि आग मे यदि घी डालो तो तेज आग पकड़ती है वरना धीरे धीरे शांत हो जाती है । ऐसा ही हुऑ । यह देखकर वह महिला सोचने लगी कि पहले दिन से ही इसका इतना असर ।अब जब भी झगड़े की स्थिती होती वह तुरंत मुँह मे दो घूँट दवा भर लेती ।ऐसा करने से घर मे धीरे धीरे झगड़ा शांत होने लगा और खुशी का माहौल बनने लगा ।वह दौड़ी दौड़ी अंकल चिकित्सक के पास गई और बोली अंकल जी आपने तो बहुत बढ़िया दवा दी । आपने तो कहा था कि पॉच सात दिन मे शांति हो जायेगी लेकिन दवा ने तो पहले ही दिन असर दिखाना शुरू कर दिया ।अब घर मे मानो स्वर्ग उतर आया । आनंद ही आनंद है ।

शीर्षक – गुस्से की अचूक दवा है मौन । समय पर जो व्यक्ति मौन रख लेता है उसका परिणाम बहुत ही मधुर होता है । गुस्से वाली स्थिती मे हर इंसान को दो चार मिनट मौन धारण कर लेना चाहिये ,जिसे गुस्से वाला वातावरण अपने आप शांत हो जायेगा ।

तेज गुस्सा आने पर हमेशा मौन रहो 

 दो चार पल मे गुस्से को शांत होना ही पड़ेगा ।

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. वाह, अच्छा है।

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