शादी योग्य लडकी का चित्रण ….

एक मेरी सहेली थी उसका नाम संजोली था ।वह दिखने मे आकर्षक थी पर रंग साँवला था । संजोली की आज सगाई का दस्तूर था । रीति रिवाज के अनुसार अँगूठी पहनाई गई अब सब लोग भोजन के लिये टेबल पर बैठ चुके थे ।वहॉ संजोली अपनी अन्य सखियों के साथ बैठी थी ।सास ,ननद जेठानी भी उसके पास बैठे थे । शर्मीला स्वभाव होने की वजह से नीची नजर किये सिमटी सिकुड़ी सी बैठी थी ।जैसे तैसे खाना समाप्त कर वह अपने कमरे मे चली गई व सहेलियों से बातचीत शुरू करने ही वाली थी कि इतने में होने वाली सासूँ माँ ,ननद व जेठानी कमरे में आयी । सासूमॉ संजोली के पास बैठते हुए बोली, देखो संजोली अब शादी में कुछ ही महीने बचें हैं इसलिये धूप में बाहर ना निकलना व हर रोज बेसन, दूध ,केसर और हल्दी का लेप लगाया करना। उससे तुम्हारा साँवला रंग साफ़ हो जाएगा । संजोली ने “जी ” बोलकर हाँ में सिर हिला दिया ।अब जेठानी भी कहॉ पीछे रहने वाली थी । वह चहकते हुए बताने लगी अगर नींबू और टमाटर का रस भी लगाओ तो रंग और साफ़ हो जाएगा। देवर जी को गोरे रंग की लड़कियाँ पसंद हैं । हँसी हँसी मे बात आई गई हो गई ।

 धीरे-धीरे कर के शादी के दिन नज़दीक आने लगे ।जब भी ससुराल से फ़ोन आता तो दोपहर मे धूप मे नही जाने का ,ऑफ़िस से जल्दी आने का व फ़ेस पैक लगाने का ,ऐसी ही सलाहे मिलने लगी।

उसका होने वाला पति विकी जब भी उसे फ़ोन करता तो अधिकतर, उसके साँवलेपन को ले कर कुछ ना कुछ छींटाकशी कर देता था और कहता, संजोली मुझे तुम्हारे साँवले रंग से कोई शिकायत नही है, मगर मम्मी चाहती है कि बहू का रंग गोरा हों। भाभी तो एकदम दूधियॉ रंग की हैं, तुम थोड़ी साँवली हो,इसलिये वो जो भी  गोरा करने के लिये नुस्खे देती हैं उसे अमल कर लिया करो आख़िर ख़ूबसूरत तो तुम ही दिखोगी।

संजोली बहुत कुछ जवाब देना चाहती मगर मम्मी की कुछ भी ना बोलने की दी गई हिदायतें की वजह से चुप रह जाती। इस वजह से अंदर ही अंदर कुढन होने लगती व सारी खीज मम्मी पर निकालती ।  यदि कुछ बोलने की कोशिश करती तो मम्मी कहती, अरे इतने अच्छे पैसे वाले घर में रिश्ता हो रहा है, सिर्फ़ इसलिए कि तू अच्छी कंपनी मे अच्छे पद पर नौकरी करती है वरना एक साधारण स्टेशन मास्टर की बेटी की शादी का रिश्ता कभी भी यहॉ ना जुड पाता ।  तू देख, वो कितने अमीर लोग हैं । बडे बडे लोगो के साथ उठना बैठना है । सॉशियल नेटवर्क तो कितना बड़ा है । एक ही झटके मे सारा काम हो जाता है । राज करेगी राज !! इतनी अच्छी क़िस्मत पाई है । 

 तू बहुत लकी है जो तेरे सॉवलेपन के बाद भी उन्होंने तुम्हें स्वीकारा है। संजोली बेचारी मन मारकर चुप हो जाती। सोचती की बदलते वक़्त के साथ सब ठीक हो जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे दिन नज़दीक आने लगे, सासूमॉ और विकी का रंग को लेकर उस पर पर दवाब बढ़ने लगा।

संजोली ये सब नजरअंदाज करना तो चाहती मगर कर नही पाती। फिर ख़ुद ही अन्दर ही अन्दर और ज्यादा चिढ़ने व कुढने लगी। इस वजह से रंग खिलने की बजाय मुरझाने लगा।

शादी से दस दिन पहले विकी का जन्मदिन था। विकी ने पार्टी में संजोली को भी बुलाया ।  रोज की तरह वही रंग को लेकर हिदायतें दी जाने लगी ।

सासू माँ ने पहले ही फ़ोन पर समझा दिया था कि ब्यूटी पार्लर होती हुई पार्टी में आए। माँ ने भी छोटे भाई के साथ संजोली को पार्लर भेज दिया।

 संजोली जब पार्टी में भाई के साथ पहुँची तो बिना मेकअप (नेचुरल चेहरा) के !! उसे देखते ही, सासूमाँ उस पर गुस्सा होने लगी और जेठानी को बुला कर बोली कि इसे बाथरूम में ले जाओ और अपने मेकअप से तैयार कर दो । मगर संजोली नही गयी। वहीं खड़ी रही। सासूमॉ के गुस्से का पारा और चढ़ गया और उसके हाथ खिंचते हुये बोलीं जाती हो या नही । संजोली टस से मस ना हुई । अब उसकी सासूमॉ चिल्लाने लगी कि न रंग है न रूप, फिर तुम्हें इतना घमंड ? गलती हम लोगो की ही है जो हम ने अपने से नीचे घर मे रिश्ता जोड़ा है ।सिर्फ इसलिये कि तुम अच्छी कम्पनी मे अच्छे पद पर हो ।

इतने में हल्ला सुनकर वहॉ विकी भी आ गया और संजोली का हाथ पकड़ कर ज़बरदस्ती बाथरूम की तरफ़ ले जाने की कोशिश करने लगा ।

संजोली ने उसके हाथ से अपने हाथ को आज़ाद करवाते हुए सासूमाँ की तरफ़ बढी और बोली,हाँ, मैं साधारण घर से हूँ।मेरा रंग साँवला है। मुझे घमंड तो नही मगर गर्व है अपने आप पर। मैं अपनी कड़ी मेहनत से आज इस मुकाम पर हूँ । मेरे घरवाले आपके जितने पैसो की तरह अमीर तो नही है लेकिन दिल की अमीरी कूट कूट कर भरी है । किसी भी इंसान को अपने जैसा इंसान समझते हैं । उन्हें रंग-रूप के आधार पर नही गुणों से तोलते हैं । और विकी तुम्हारी कोई गलती नही है, क्योकि तुमने बचपन से जो देखा है उसी के अनुसार ही तो सोचोंगे । तुम्हारे परिवार वालो व तुम्हारी नजर मे औरत का साज श्रंगार होना तो बहुत जरूरी है क्योकि वह तो एक घर मे सजावटी वस्तु की तरह है । ऐसी मेरी पहचान नही चाहिये ।

ऐसा कहते हुए संजोली मे अपनी अँगूठी निकाल कर विकी की मॉ के हाथ में थमा दी और अपने छोटे भाई का हाथ पकड़ कर, पार्टी हॉल से बाहर निकल गयी, 

 एक मस्त हवा के झोंके की तरह ,एक स्वतंत्र पक्षी की तरह जिसे अभी बहुत उड़ान भरनी है और इंतजार ऐसे शख़्स का जो उसे हमसफर उसके गुणों के आधार पर बनाये न कि रंगरूप या पैसो से ।

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏 

4 Comments Add yours

  1. वाह
    बहुत ही सुन्दर

    Liked by 1 person

  2. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति 👍

    Liked by 1 person

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