अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष….भाग एक ….

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष….भाग एक ….हमारे भीतर दो मन होते है : – चेतन मन और अवचेतन मन। चेतन मन यानि वह मस्तिष्क, जो सोचता है और जिसके बारे में हम जागरूप होते है। दूसरी ओर, हमारे भीतर एक अवचेतन मन भी होता है, जो हमें दिखाई तो नहीं देता है, लेकिन यह हमें…

धन की गति ……

Good day to all divine souls …….. धन की तीन गतियाँ है  दान,भोग और नाश जो धन देता नही ,भोगता नही उसकी तीसरी गति  धन का नाश हो जाती है