तीर्थंकर भगवान श्री सीमंधर स्वामी का परिचय ….

तीर्थंकर भगवान श्री सीमंधर स्वामी का परिचय ……. तीर्थंकर का अर्थ है पूर्ण चंद्रमा,जिन्हें आत्मा का संपूर्ण ज्ञान हो चुका है । ब्रह्मांड के मध्यलोक जिसका आकार गोल है उसमे 15 प्रकार के क्षेत्र है ।  मनुष्य के जन्म लेने व रहने लायक ये 15 क्षेत्र है ।उनके नाम इस प्रकार है — पॉच भरतक्षेत्र…

चिन्ता ……

Good day to all divine souls ……… चिन्ता …. चिंता और चिता एक समान है केवल बिंदु मात्र का अंतर है चिता तो मुर्दे को जलाती है चिन्ता ज़िन्दा को ही भस्म कर देती है । चिन्ता घुन की तरह होती है ….जैसे घुन गेहूँ को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है वैसे ही…