पैतृक कार्य मे शर्मिंदगी कैसी ….

पैतृक कार्य मे शर्मिंदगी कैसी …….. आजकल के अधिकांश छात्र कॉलेज अध्ययन करके निकलते है तो वह अपने पिता के पुश्तैनी काम मे मदद करने मे अप्रतिष्ठा का अनुभव करता है लेकिन कुछ दिनो पहले इससे विपरीत उदाहरण देखने को मिला । एक दिन शाम के समय संजना बडे बाजार गई । घर का सामान…

खुद पर विश्वास रखे ….

Good day to all divine souls …….. दूसरो की छाया मे खड़े रहकर हम अपनी परछाई खो देते है । अपनी परछाई के लिये हमे खुद धूप में खड़ा होना पड़ता है