कोई लौटा दे बचपन के वो दिन –  जिंदगी की किताब – ( पन्ना # 2 ) 

कोई लौटा दे बचपन के वो दिन …… एक दिन दूसरे शहर मे बाजार घूमते घूमते,बरसो बाद अपने पुराने दोस्तों से अचानक मुलाक़ात हो गई और हम सब मिलकर एक रेस्टोरेंट गये । ।बाते करते करते बीते बचपन को याद करने लगे । हम सब बचपन के अहसास भरे क्षण मे इतने खो गये कि…

बातचीत के अंग – जिंदगी की किताब (पन्ना # 207)

Good day to all divine souls …….  किसी को बुरा मत बोलिए और किसी को अच्छा बोले बगैर मत रहिए। आलोचना एक ऐसा जहर हैं जिसे कोई पीना नहीं चाहता और प्रशंसा एक ऐसा माधुर्य हैं जिसे हर कोई पीना पसन्द करता हैं। जो लोग जिसे पसन्द करते हैं, उन्हें वही पिलाइये न …. आपकी…