बातचीत के अंग – जिंदगी की किताब (पन्ना # 207)

Good day to all divine souls …….

 किसी को बुरा मत बोलिए और किसी को अच्छा बोले बगैर मत रहिए। आलोचना एक ऐसा जहर हैं जिसे कोई पीना नहीं चाहता और प्रशंसा एक ऐसा माधुर्य हैं जिसे हर कोई पीना पसन्द करता हैं। जो लोग जिसे पसन्द करते हैं, उन्हें वही पिलाइये न ….

आपकी आभारी विमला
जय सच्चिदानंद 🙏🙏

5 Comments Add yours

  1. बिल्कुल सही,

    पर वो क्या करे,
    जो लगातार आलोचना का शिकार हो रहा?
    क्या वो सिर्फ तारीफ़ ही करे दूसरों का,
    कहीं ये तारीफ़ चापलुसी तो नही मान ली जायेगी?
    किताबी बातें तो अच्छी लगती है पढने और सूनने में,
    पर क्या सही में इतना सुंदर है संसार?

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    1. आपकी भावना का आदर करती हूँ
      लेकिन मेरा मानना है कि किताबें अनुभव के आधार पर लिखी जाती यह अलग बात है कि हम उससे कितने सहमत है ।
      सुंदर मन ही हमारा संसार है
      हमे आलोचनाओं से बचना चाहिये ।
      बेवजह तारीफ़ करने का कोई मतलब नही है
      बाकि तो ये दुनिया ऐसी है कि सुधारने जायेंगे तो थक जायेंगे

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      1. धन्यवाद 🙏🙏🙏

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  2. Madhusudan says:

    सच्चाई कहा आपने।

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