जिंदगी की किताब (पन्ना # 217)  रक्षाबंधन का त्योहार 

आया रक्षाबंधन का त्योहार

रिश्तों में मिठास घोलने 

टूटे रिश्तों को जोड़ने 

भाई बहन का रिश्ता है 

मछली और सरोवर जैसा है

जब तक जियेंगे साथ रहेंगे

त्योहार नही है सिर्फ 

महज धागों को बॉधने का 

त्योहार है जुड़ने और जोड़ने का 

अगर आ गई है रिश्तो मे दरार

हो गई हो कोई भी बोलचाल

तो देर है किस बात की 

उठो और डायल करो फोन

बोल दो राखी बंधवाने आ रहा हूँ

या राखी बॉधने आ रही हूँ 

बस हमारा इतना सा बड़प्पन

इस पर्व को कर देगा धन्य

और दूरियॉ हो जायेगी 

हमेशा के लिये खत्म

और भी मायने है राखी त्योहार के

एक-दूसरे की रक्षा करने के लिये

आओ रक्षा करने का संकल्प करे

हर एक नारी की 

उसके आन, बान और शान की 

मर जाएँगे, 

पर नारी की लाज को ऑच नहीं आने देंगे।

बहिन बिना भाई अधूरा और परिवार सूना

यदि सगी बहिन ना मिली तो क्या हुआ

ईश्वर को धन्यवाद है बार बार 

उसने हमें हजारों बहिनें जो दी 

राखी केवल भाई-बहिन ही नहीं, 

वरन् सास-बहू, देवरानी-जेठानी, 

भाई-भाई, देवर-भाभी भी मनाये

और राखी बाँधने के बहाने 

मन की गॉठे खुलवाये

 मनमुटाव, दूरियाँ ,पुरानी बातों को 

एक साथ कूड़ेदान में फेंक दें।

इसी बहाने दो टूटे हुए दिल एक हो जाएँगे

ख़ुशियाँ और प्यार की सौग़ात ले आयेंगे

और धन्य बन जायेगा

ये राखी का त्यौहार

रक्षाबंधन की सबको हो ढेर सारी बधाईयॉ 

❤️🌹❤️🌹❤️🌹❤️🌹❤️🌹❤️🌹

आभारी विमला

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bhaayee bahan ke pyaar ke naam bahut achchhi kavita….

    Liked by 1 person

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