रक्षाबंधन की सबको बँधाई-जिंदगी की किताब (पन्ना # 228)

राखी आई राखी आई बहन भाई का प्यार लाई 

ख़ुशियों की सौगात लाई

देख भाई बहन का प्यार    

अश्रु बूँद की झलक आई

दिलो मे मुस्कान लाई

सभी दूरियो को भुलाकर

रूखे मन को सरोबार कर 

नहला दे बहन भाई का प्यार

तृप्त ह्रदय सरस प्रेम से 

सहला दे बंधन का तार

राखी का ऐसा ही त्योहार

दूरियॉ चाहे कितनी भी हो 

पर कभी ना टूटे प्यार

चाहे कितनी भी हो तकरार 

फिर भी बरकरार ये प्यार 

राखी का ये सुंदर त्योहार

भाई बहन के पाक रिश्ते मे 

टूटे ना अहसास के धागे

उसमे मिले स्नेह के मोती

फूलो की तरह हमेशा

रिश्ता ये महकता है 

प्यार कभी कम नही होता है 

बहना कहती है भईया से 

नही चाहिये कोई उपहार 

दे दो सिर्फ प्यार की सोगात

अनगिनत दुआऐ देती है बहना

भाई की ख़ुशियाँ रहे बरक़रार 

चाहे कितनी भी हो तकरार

प्रेम से सजा सकती है ये त्योहार

रखडी बॉधे मन ही मन बोले बहना 

भईया राखी के बंधन को निभाना

भईया सोचे सारी उम्र हमे संग रहना है 

रक्षाबंधन की सबको ह्रादिक शुभकामनाये 

5 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    Bahut badhiya kavita…Happy Rakshabandhan…

    Liked by 1 person

  2. pkckd1989 says:

    बहुत ही खूबसूरत सी कविता है दी।

    Liked by 1 person

    1. धन्यवाद । हैपी रक्षाबंधन

      Like

      1. pkckd1989 says:

        😊

        Liked by 1 person

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