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  1. Madhusudan says:

    बिल्कुल –वैसे याद है हमने कभी मुर्गा नही बना । परंतु जिसने भी मुर्गा बना उसके कॉपी में अंडा देख ऐसा लगता था कि वाकई वह मुर्गा बनने लायक था तभी तो अंडा मिला।
    इस हास्य में बचपन,बचपन मे सच्चाई है,
    इसी अंडे ने कितनो की किस्मत बनाई है,
    खो गया आज मैं उस छोटे स्कूल में,
    बचपन था गुजरा उस कच्चे स्कूल में,
    मेरी हर यादे उस मंदिर में समाई है,
    इस हास्य ने आज हमें बचपन दिखाई है।

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    1. वाह वाह आपने तो इसपर बहुत खूबसूरत कविता लिख डाली…👍

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  2. Madhusudan says:

    Murga andaa nahi deta😁😁😁

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  3. Madhusudan says:

    Ha ha ha….😁😁😁

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