काल चक्र (भाग चार) — जिंदगी की किताब (पन्ना # 285)

4. चौथा आरा –
 दुषमा – सुषमा काल 

शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते है । तीन आरों के बारे मे आपको जानकारी मिल चुकी है। तीसरे आरे की ठीक समाप्ति के साथ ही चौथे आरे का आरम्भ होता है । इसमे दुख अधिक और सुख कम होता है । इसके प्रारम्भ मे मनुष्यों की अधिकतम ऊचॉई 525 धनुष, आयु आयु एक पूर्वकोटि तथा पृष्ठास्थो की संख्या 64 होती है । पुदगलो की उत्तमता हो जाती है ।मनुष्यों का देहमान 500 धनुष का रह जाता है । उतरते आरे सात हाथ का देहमान व 200 वर्ष से कुछ कम का आयुष्य रह जाता है । इस आरे मे कल्पवृक्ष कही भी नही दिखाई देता है ।इस युग ने मनुष्य भूख से सदैव त्रस्त रहते है । उन्हे बार बार खाने की आवश्यकता होती है । इस युग का मानव श्रमजीवी हो जाता है । भोजन अब साधारण फलो का हो जाता है । दुख ,शोक , रोग , संताप , भय ,मोह , लोभ ,जलन ,आदि मे पहले की अपेक्षा वृद्धि हो जाती है । लोगो मे भय और चोरी छिपे पापकर्म करने की प्रवृति जाग्रत हो जाती है ।विभिन्न प्रकार की कलाओं ,व विदधायो , की शोध भी इसी युग मे होती है ।दान देने की प्रवृति , स्वर्ग -नर्क की भावना भी लोगो के मन मे बलवती होती है । भगवान ऋषभदेव को छोड़कर सभी तीर्थंकर इसी आरे मे हुये ।

आगे पढिये पॉचवे आरे के की स्थिती के बारे मे जो अभी चल रहा है ….continued 

आपकी आभारी विमला मेहता

लिखने मे गलती मे क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

4 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    हमलोग क्या चौथे आरे में ही हैं या पांचवे में?…….हमारे गांव के पास आज भी एक कल्पबृक्ष है जहाँ मेला लगता है।

    Liked by 1 person

    1. अभी पॉचवां आरा चल रहा है । हॉ कल्पवृक्ष कही कही अभी देखने को मिलते है पर इनका प्रभाव नही रहा । राजस्थान के नाकोड़ा भैरव मन्दिर मे भी कल्पवृक्ष है ।

      Like

      1. Madhusudan says:

        Dhanyawad..pataa nahi chhathe aaraa me kyaa hoga…

        Liked by 1 person

        1. आगे क्या होने वाला है वह जैन शास्त्र मे पॉचवे आरे व छुट्टे आरे मे वर्णन किया गया है ।

          Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s