जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन – जिंदगी की किताब (पन्ना # 293)

एक संत थे । वह जंगल मे रहते थे । वहॉ उनको आत्मिक सुख की जो भी अनुभूति मिलती वह शहर मे नही मिलती । एक दिन उस शहर का राजा संत के पास जाकर बोले की महात्मन यहॉ आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है आप मेरे साथ राजमहल मे चलिये वहॉ आपको कोई भी परेशानी नही होगी । आपकी साधना करने मे भी विघ्न ना आ पाये उसके लिये भी पूरा ध्यान रखा जायेगा । राजा के भावो को देखकर संत मना ना कर पाये और वह राजा के साथ महल मे रहने को आ गये । तीन चार महीने गुज़र गये । एक बार राजा अपनी बहुमूल्य हीरे की अँगूठी रखकर भूल गया । संत को वह अँगूठी पड़ी मिल गई । अँगूठी को देखकर उनका मन बदल गया और वह अँगूठी को चुराकर रातों रात जंगल की और चले गये । रास्ते मे उनको भूख लगी तो वहॉ वृक्ष से फलो को तोड़कर खाने लगे । फल कि प्रकृति ऐसी थी कि उनको खाते ही दस्त शुरू हो गये । पेट पूरा साफ़ हो गया । धीरे धीरे उसके विचारो मे परिवर्तन होने लगा और अपने आप को धिक्कारने लगा कि वह महात्मा नही चोर है । एक संत होकर चोरी ,ऐसा कार्य जो बिल्कुल भी अच्छा नही है । 

ऐसे विचार आते ही संत को अपनी गलती का अहसास हुआ और तुरंत दौड़ता हुऑ राजा के पास पहुचॉ । रात का समय था । सभी सो रहे थे । वह तेज़ आवाज़ मे बोला उठो राजन । ये अपनी अँगूठी सम्भालो जो मै चुराकर भाग गया । राजा हड़बड़ाकर उठा और बोला कि वापस देना ही था तो लेकर ही क्यों गये । संत बोले कि राजन तुम्हारे यहॉ चार महीने रहकर जो अन्न खाया उससे मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई और मेरे विचारो मे विकृति पैदा हो गई जिसकी वजह ये अंगूंठी चुराकर भाग गया । लेकिन जंगल मे कुछ फल खाने से दस्त हो गये व पेट साफ़ हो गया । पेट साफ़ होते ही सदबुद्धि जाग्रत हो गई ।तब मुंझे अनुभव मे आया कि अन्न का इतना प्रभाव पड़ता है । ये कहकर संत वापस जंगल मे चले गये ।

अन्न का तो इतना प्रभाव पड़ता है कि यदि भोजन पकाने का काम अच्छे भाव से या अच्छे मूड से ना किया जाये तो पकाने वाले के वाईब्रेशन भोजन मे समाविष्ट हो जाते है और  उसका प्रभाव खाने वाले पर पड़ता है । इसलिये भोजन हमेशा खुश होकर अच्छे भावो से पकाना चाहिये । 

इसलिये कहा जाता है कि 

 जैसा खाओगे अन्न ,वैसा बनेगा मन । 
आपकी आभारी विमला मेहता 

लिखने मे गलती हो तो क्षमायचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

4 Comments Add yours

  1. Wow!
    Mummy bhi yahi kahi hain hamesha.

    Liked by 1 person

  2. Madhusudan says:

    bilkul sahi kaha ….jaisaa khaaoge ann waisaa banega man…….kuchh bhi khaayen soch samajh kar khaayen…….tamsi bhojan tamas hi deta hai.bahut khub.

    Liked by 1 person

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