विवाह करने का कारण -जिंदगी की किताब (पन्ना # 295)

आज विवाह के बारे मे कुछ कहना चाहूँगी । 

विवाह ऐसा बंधन है जिसे सभी खुशी से स्वीकारते है । विवाह के नाम से मन मे कुछ कुछ हलचल होने लगती है ।

यह अलग बात है कि शादी के बाद किसी को कितनी खुशी या दुख मिलता है ?

इस लेख मे शादी के बंधन मे बँधने का क्या अभिप्राय है उसे बताने की एक छोटी सी कोशिश एक दृष्टांत के ज़रिये करूंगी 

एक व्यक्ति जंगल मे बने पर्वत की गुफाओ मे रहता था । वहॉ पर जंगली जानवर भी विचरते थे । एक बार हिरण की घोड़े से लड़ाई हो गई । लड़ाई लड़ाई मे हिरण ने घोड़े को अपने नुकिले सींग चुभो दिये । घायल घोड़ा उस व्यक्ति के पास मदद मॉगने गया और बोला कि हिरण को उसके किये का फल चखाया जाये । वह व्यक्ति जाकर तीर कमान ले आया और घोड़े पर सवार होकर हिरण के पास गया और उसे मार गिराया । घोड़ा अहसान जताता हुआ उस व्यक्ति से बोला कि आप को जब भी मेरी जरूरत पड़े मुझे बुला लेना । वह मनुष्य बोला कि तुम्हे कही जाने की जरूरत नही है मेरे साथ रहो । हम दोनो मित्र की तरह सदा साथ रहेंगे । मुझे सवारी के लिये तुम्हारी जरूरत पड़ेगी और सुरक्षा के लिये तुमको मेरी जरूरत पड़ेगी । उस दिन से दोनो साथ रहने लग गये ।

 इसी प्रकार विवाह के बंधन मे बँधने का मतलब ऐसे इंसान की जरूरत जो जिंदगी भर साथ दे व एक दूसरे का पूरक बनकर रहे । 

पति पत्नी एक रथ के दो पहिये है । इन दो पहियों से पूरा समाज चलता है । इस रथ को चलने के लिए इन दोनों पहियों को सही तरीके से चलना बहुत ही जरूरी है

सुख हो या दुख एक दूसरे की भावना का आदर करते हुये ,पूरा विश्वास रखते हुये ,सहयोग देते हुये प्रेम से जीने लगे तो कोई कारण नही बनता है शादी टूटने का । इस तरह से शादी होने के बाद जीने की खुशी का अहसास अलग ही होता है । 

हालाँकि आज के वातावरण मे अनेको ऐसे कारण बन जाते है जिसकी वजह से अधिकतर शादियॉ टूट गयी है या टूटने की कगार पर है , तलाक़ की दरे बढ़ रही है । इसका एक कारण यह भी बनता है कि शादी जिस प्रयोजन से की जाती है उसकी परिभाषा ही बदल गई है । अहंकार एक दूसरे पर चढ़कर बोलने लगा है । शादी के बाद जो दिक़्क़तें आती है वह झेल नही पाते है …..ऐसे अनेक कारण है जो शादी को जोड़ने की बजाय तोड़ देते है । शादी से पहले इन सभी बातो से लडका लडकी अनभिज्ञ होते है इसलिये शादी का नाम आते ही शादी नाम का लड्डू खाने का मन करता है । 

पति पत्नी सिर्फ एक दूसरे का सहारा ही नही जिसे थामकर दिल सँभलता है ।
बल्कि एक दूसरे का वो साथ हो जो मंजिल सा लगता है 
ये रिश्ता कोई ख़्वाब नही जो ऑंख खुलने से बिखरता है 
बल्कि वो ख़्याल है जिसको सोचकर जीवन चलता है ।
ये रिश्ता कोई फूल नही जो एक दिन मे मुरझा जाये
बल्कि वो ऐसी ख़ुशबू है जो  सारे जीवन को महका जाये ।
पति पत्नी सिक्के के दो पहलू है ।
जो एक दूसरे का पूरक बनकर पूरी जिन्दगी जीते है ।
एक तरफ दोनो , तो दूसरी तरफ पूरा संसार 

साथ मिले तो गिरा दे हर रास्ते की दीवार ।
एक दूसरे के बिना जिन्दगी लगती है भंगार ।
सात जन्मों तक साथ निभाने को हो जाते है तैयार ।

गम या खुशी का पल ही क्या ,जिसमें दोनो शरीक नही
रथ के दो पहिये की तरह होंगे ,तो प्यार से रह पायेंगे संग संग ।
सदाबहार रहे प्यार , यही रिश्तो का सार !!

आजकल पति पत्नी के रिश्तो मे दरार आते आते तलाक़ तक स्थिती पहुँच जाने की दर तेज़ी से बढ़ रही है …इसका क्या कारण है आप सब की राय का स्वागत है ।

आपकी आभारी विमला मेहता 

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

5 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    बहुत ही खूबसूरत पोस्ट—–अगर रिश्ते की अहमियत समझे,एक दूसरे पर भरोसा और कद्र की भावना रखे तो कभी जिंदगी में दरार नही होगी।सच कहा पति पत्नी एक गाड़ी के दो पहिये है।
    दोनों कदमताल में चले तो ,
    गाड़ी मंजिल को पाती है,
    एक भी रास्ता भटका तो,
    मंजिल दूर निकल जाती है,
    बिखर जाते हैं सपने,
    फिर बीच ही डगर में,
    प्रेम की जगह वाणी,जहर बन जाती है।

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    1. आपने बहुत सुंदर पंक्तियाँ लिख कर इस लेख को और खूबसूरत बनाया है …धन्यवाद

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      1. Madhusudan says:

        धन्यवाद आपका।

        Liked by 1 person

  2. The creative dude says:

    “C”

    Liked by 1 person

    1. धन्यवाद! मुझे भी यही मुख्य कारण लगता है

      Liked by 1 person

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