जिन्दगी का सफर – जिन्दगी की किताब (पन्ना #  318)

हर कोई महकता गुलाब की ख्वाहि़श जरूर रखता है 

गुलाब सभी को पसंद आता है तो कॉटा सभी नापसंद होता है 

पर गुलाब के लिये कॉटे से मुलाकात तो करनी पड़ती है 

दोनो का संग एक ही डाल पर होता है 

फिर भी गुणों मे गुलाब और कॉटे का फासला दिन रात का होता है 

क़ुदरत कॉटो के बीच गुलाब के अस्तित्व की ऐसी व्यवस्था करता है 

जो सबको स्वीकार करना पड़ता है 

हम सब को जीवन मे गुलाब और कॉटो की तरह जिन्दगी का सफर तय करना पड़ता है 

जहॉ इंसान के जीवन के सद्गुणों के गुलाब का उदय सभी को पसंद आता है 

जो हम सबकी जिंदगी मे खुशियॉ व आनंद का आदान प्रदान करता है 

पर इससे विपरित दुर्गुण जो स्पष्ट कॉटे की तरह होने से सबको नापसंद आता है 

जो स्वयं के साथ दूसरो को भी विषाद ,दुख, उद्वेग, ग्लानि और खेद उत्पन्न कर पीड़ा दुख पहुचाते है 

हम इंसानो को तो गुणों मे गुलाब की सुगंध का लाभ उठाना है 

चाहे कॉटे रूपी दुर्गुण से मुलाकात भलई ही हो जाती है 

पर अपनी नजर हटाकर गुलाब का चयन ही करना है और उसी की माला बनाना है 

फिर चाहे जो कुछ भी हो हमारा विजयी होना सुनिश्चित ही है ।

Har koi mahakta gulab ki tarah khawaish jaroor rakhata hn

Gulab sabhi ko pasand aata hn toh kata sabhi ko napasand hota hn

Per Gulab ke liyae kattay se mulakat toh karni padti hn

Dono ka sang ek hi dal per  hota hn

Phir bhi gunoo mn Gulab aur kattay ka phashla din raat ka hota hn

Kudarat katto ke bich galab ke astitav ki aaise vayavastha karta hn

Jo sabko savikar karna padta hn

Hum sab ko bhi jiwan mn gulab aur katoo ki tarah jindgi ka safar taya karna padta hn

Jaha insan ke jiwan ke sadgunoo ke gulab ka uday sabhi ko pasand aata hn

Jo hum sabki jindgi mn khushiya aur anand ka aadan pradan karta hn

Per issay viprit durgun jo kattay ki tarah honay se sabko na pasand aata hn

savyam ke saath dusro ko bhi visad, dukh,udvag,galani,aur khed utpaan kar pida pouchattay hn

Hum insaano ko toh gunno mn gulab ke sugandh ka labha uthana hn

Chahay kattay rupi durgan se mulakat bhale hi ho jati hn

Per apni nazer hattakar gulab ka chayan hi karna hn aur usi ki mala banana hn

Phir chahay jo kuch bhi ho hamara Vijaya hona sunichit hi hn

आपकी आभारी विमला विल्सन 

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

4 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    वाह—सद्गुण और दुर्गुण को बहुत ही बेहतरीन तरीके से समझाने का प्रयास किया है।बहुत खूब।

    Liked by 1 person

    1. धन्यवाद आपको अच्छा लगा
      हालाँकि कविता को अच्छी तरह से लिख नही पाती हूँ फिर भी प्रयास जारी है ।

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      1. Madhusudan says:

        आप लिख पाती हैं सबका धुन लै एक समान और एक तरह के नही होते साथ ही उचित संदेश सारे धुन लै अपने आप बना लेते हैं।स्वागत आपका।

        Liked by 1 person

        1. बढ़ावा देने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया ।

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