जल्दबाज़ी ना करे – जिंदगी की किताब (पन्ना # 320)


ना करे हड़बड़ी , कभी ना होगी गड़बड़ी 

हमे कभी भी कोई कार्य जल्दबाजी मे ना करके सोच समझ कर करना चाहिये क्योकि जल्दबाज़ी मे कार्य गड़बड़ होने की ज्यादा संभावना रहती है । साथ मे दिमाग मे खिंचाव व तनाव ज्यादा होने से कार्य भी देरी से होता है व शक्ति भी ज्यादा खर्च होती है 

खुद को कोई भी कार्य करने मे व्यस्त जरूर रखे पर उसके लिये स्वयं को अस्त व्यस्त ना करे । 

 जिन्दगी मे जो इंसान कार्य करने से जी चुराता है या शॉर्टकर्ट मे रातों रात करोड़पति बनने का सपना देखता है वह जिन्दगी मे वही के वही रह जाता है ।हमे स्वयं के परिश्रम पर भरोसा रख कर कार्य करना चाहिये ।

इस बारे मे एक घटना याद आती है । 

एक बहुत ही सुंदर पर्यटक स्थल पर हॉटल खुला । काफी लोगो का आना जाना था । उस हॉटल के बाहर बडे बडे शब्दो मे लिखा था कि …

“आइये जी भरकर खाइये , बिल भुगतान करने की तनिक भी चिंता ना करे । आपके बिल की रक़म आपके बेटे या पोते से ले ली जायेगी ” 

एक मुफ़्तख़ोर उधर से गुज़र रहा था । उसने यह पढ़ा तो सोचा कि मेरी तो अभी तक शादी नही हुई है तो हॉटल वाला बेटे पोते से बिल कैसे ले पायेगा । फिर तो खाना मुफ़्त मे हो जायेगा क्यूँ ना मुफ्त का भोजन जमकर किया जाये । हॉटल मे जाकर तरह तरह की खाने की चीजे ऑर्डर की । छककर खाना खाया । भोजन समाप्ति पर वह बाहर जाने लगा तो हॉटल मालिक ने बड़ी रक़म का बिल उसके हाथो मे थमा दिया । वह आदमी गुस्से मे बोला कि यह आप क्या कर रहे है बाहर तो बिल भुगतान की बात बेटे या पोते के द्वारा होगी ,यह लिखा हुऑ है । हॉटल मालिक बोला कि वही तो मै कर रहा हूँ । यह बिल तो आपके बाप दादाजी का है जो आपके लिये छोड गये है । मन ही मन वह व्यक्ति सोचने लगा कि आज बुरा फँसा , मुफ्त खाने की हड़बड़ी  मे यह बात सोची भी नही ।

इसलिये कहा जाता है कि जीवन मे कोई भी कार्य हड़बड़ी मे ना करे और मुफ़्त के मालपुऐ खाने से बेहतर है रूखी सूखी रोटी खाये ।

आपकी आभारी विमला विल्सन 

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏