प्रणाम का महत्व # जिंदगी की किताब (पन्ना # 321)

प्रणाम करना या चरण स्पर्श करना एक परंपरा या बंधन नहीं है बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक तथ्य छिपे हुये है,जो कई तरह से हमारे शारीरिक, मानसिक और वैचारिक विकास मे सहायक होते है ।

चरण स्पर्श करने के तीन तरीके होते है पहला झुककर ,दूसरा घुटने के बल बैठकर तथा तीसरा साष्टांग प्रणाम करना ।

चरण स्पर्श से केवल बड़ों का आशीर्वाद ही नहीं मिलता है बल्कि इससे शारीरिक कसरत भी हो जाती है।

किसी भी बड़े को प्रणाम या चरण स्पर्श करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जब हम किसी के चरण छूते है तो उसके प्रति मन में समर्पण का भाव आने से अहंकार स्वत: ही खत्म होता है । सिर्फ इतना ही नहीं यदि हम भगवान के नाम के साथ बड़ों का चरण स्पर्श करते है तो पैर छूने वाले व्यक्ति को भी सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं और पुण्य का भी बंधन होता है।

आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता 

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bilkul sahi likha…..hamara dharm sirf ishwar bhakti nahi varan jeene kaa kala sikhaata hai…..pranam karna pair chhukar ….bahut hi bada udeshya chhipa hai …..jisko apne bakhubi darshaya hai…..

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    1. जी धन्यवाद । यही हमारी भारतीय संस्कृति है जिसे बचपन से पैर छूने का संस्कार दिया जाता है

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