वक्त # जिंदगी की किताब (पन्ना # 336)

जिन्दगी दौड़ भाग से भरी पर जीने के लिये वक्त नही

ऑंखें नींद से भरी पर सोने के लिये वक्त नही

हर भौतिक सुख साधन है लोगो के दामन मे पर भोगने के लिये वक्त नही

दिन रात पैसो की दौड ऐसी जहॉ थकने का भी वक्त नही

दिल घूम रहा जख्मो से भरा पर रोने के लिये वक्त नही

ग़ैरों की क्या बात करे जब अपनो के लिये वक्त नही

सारे रिश्तो को खोते जा रहे पर याद करने का वक्त नही

ग़ैरों के एहसास की क्या चिन्ता करे जब अपने एहसासों के लिये वक्त नही

अब तु ही बता ए जिन्दगी हर क्षण मरकर जीने वालों को जीने के लिये वक्त नही

जिन्दगी मे क्या खोया या क्या पाया सोचने का भी वक्त नही

ना जाने जिन्दगी का क्या होगा ?

विचारे तो सब का एक ही जवाब होगा 

शांति सुकुन भरी जिन्दगी जीने के लिये वक्त वक्त वक्त चाहिये ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏