आधुनिकता के नाम पर # गर्भपात # जिंदगी की किताब (पन्ना # 341)

पाश्चात्य संस्कृति के

बढ़ते प्रभाव से

भारतीय संस्कृति की

पवित्रता के साथ गरिमा

खंडित होती जा रही है ।

ऐसे विषमय वातावरण से

आचार शुद्धि की नींव

दिन पर दिन

खोखली व कमज़ोर

होती जा रही है ।

अब तो जागो इंसानो

कब तक यूँ ही सोते रहोगे

आधुनिकता के नाम पर

करोड़ो बच्चो की हत्या

मॉ के पेट मे हो रही है ।

गर्भपात के पापाचरण ने

व्यभिचार की अंधियारी गलियो मे

तेज रफ्तार से बढ़ती

नादान कुमारिकाओ को

निर्भय ,उच्छंखृल बना दिया है ।

व्यभिचार के पापाचरण,

दुराचरण के संग

प्रत्येक कुमारियो का जीवन

भयंकर पाप के पाट मे

फँस कर

हलक में अटक गया है ।

एक तो अनाचार का पाप
और उस पर उक्त पाप को

छिपाने के लिये

भ्रूणहत्या का महापाप ।

बहना तुम पवित्र रहना </stron

विचार ,आचार मे शुद्धि रखना

सदाचार और शील को बनाये रखना

पाश्चात्य संस्कृति की और बढ़ते क़दम को

भारतीय संस्कृति की और घुमा लेना

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

3 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bahut hi khubsurat shiksha deti aapki ye kavita…….agar kisi ne padha aur apne jivan men laaya to kavita safal.

    Liked by 1 person

    1. आज के माहौल मे बदलाव की बहुत जरूरत है नही तो धीरे धीरे भारतीय संस्कृति खत्म होती जायेगी ।

      Like

      1. Madhusudan says:

        bilkul sahi kaha……log to waise bhi samaj ko todne par pade hain……achchhi gyaan jarur dena chahiye……

        Liked by 1 person

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