धर्म …. जिंदगी की किताब (पन्ना # 360)

इस सृष्टि के लिये सबसे बडा वरदान है तो वह धर्म है ,जो

मानवता का जलता हुआ चिराग है । लेकिन धर्म का मर्म

इंसान की समझ से दूर होता जा रहा है । धर्म के नाम पर

आये दिन कुछ ना कुछ बखेड़ा खड़ा हो जाता है ।

धर्मों की गिनती करे तो पायेंगे कि साल भर मे जितने दिन है

दुनिया मे लगभग उतने ही धर्म है । हर धर्म के हजारो ,

लाखो , करोड़ो अनुयायी है , जिनका मक़सद मानव जाति के

कल्याण से जुड़ा होता है ।सभी धर्मो का मूल संदेश व

भावनायें एक है

दीये के उदाहरण से भला अच्छा उदाहरण कौनसा हो सकता

है । अलग अलग तरह के मिट्टी के दीये होते है लेकिन सबमे

ज्योति एक जैसी होती है । जिसकी नजर मिट्टी पर होती है

वो माटी माटी हो जाता है व जिसकी नजर ज्योति पर टिकी

होती है वह ज्योर्तिमय हो जाता है ।यहॉ दीया धर्म है तो

ज्योति मानवता।इसलिये मूल्य ज्योति का है दीये की नही ।

धर्म का असली उद्देश्य सारी इंसानियत को एक मंच पर लाना

है ,ना कि अलग अलग धर्मों मे बॉधना । धर्म से जीने की

कला आती है । इसे मुक्ति का पायजेब व शंखनाद बनाना है

ना कि पॉव की बेडियॉ ।

अलग अलग धर्म होते हुये भी यदि सभी की जड़ तक जाये तो

पता चलता है कि हर धर्म का संदेश हर इंसान के लिये है ।

ऐसा नही कि जैन धर्म जिसमें महावीर के अहिंसा ,

अपरिग्रह ,अनेकांत सिद्धांत जैनों के लिये हो बल्कि वह

प्राणिमात्र के लिये है या गीता का कर्मयोग, भक्तियोग ,

अनासक्ति योग हिन्दुओं के लिये हो या दया , शील ,

समाधि ,प्रज्ञा की प्रेरणा केवल बौद्धों के लिये हो ।या प्रेम ,

सेवा के द्वारा की गई आराधना ईसाइयों के लिये हो अगर

मुसलमान कहे कि सामाजिक छूआछूत व भेदभाव को

छोड़कर सारी इंसानियत को गले लगाओ । ईमान ,

इंसानियत , इबादत को जीवन मे अपनाओ तो ये प्रेरणा सारे

धर्मों के लिये है ।

धर्म की पहली सीढ़ी मंदिर , मस्जिद, चर्च …..जहॉ भी

जाकर भगवान को याद करते है , होती है । इन सीढ़ियाँ के

सहारे चढ़ते चढ़ते हम मोक्ष के द्वार तक पहुँच सकते है ।

Mandir में 6 अक्षर हैं

Masjid मे 6 अक्षर हैं

Church मे 6 अक्षर है

धर्मशास्त्रो मे 5 अक्षर है

Geeta में 5 अक्षर है

Quran में 5 अक्षर हैं

Bible में 5 अक्षर है

6 मे से 5 घटायेंगे तो बचेगा 1 (एक)

जिसका मतलब है

God is one .

जब ईश्वर ने हमे धर्म का लेबल नही दिया तो हम इंसान क्यो

धर्म का लेबल लगाकर अपनी अमूल्य जिन्दगी को खोते जा

रहे है ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bahut hi achchaa likha aur nishkarsh bhi badhiya hai……sau shabdon ke ek shabd……..ham insaan ek hai……alag bhumi par anek dharm huye magar koyee nafrat nahi sikhaataa agar koyee nafrat sikhaataa hai phir wah dharm nahi…….aur insaan nahi.

    Liked by 1 person

    1. सही समझा …. सराहने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया

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