मातृभूमि की महत्त्वता # जिंदगी की किताब (पन्ना # 367)

मातृभूमि की महत्त्वता ……

अमेरिकन डॉक्टर थॉर एक आध्यात्मिक विद्वान थे । एक बार वे अपने शिष्यों के साथ जंगल मे गये ।वहॉ उसके शिष्यों ने थॉर से प्रश्न पूछा कि स्वर्ग की भूमि अच्छी है या यहॉ की भूमि ?

थॉर ने जवाब दिया – जो भूमि तुम्हारे बोझ को सहन कर रही है , जिस भूमि के उपादानो से तुम्हारे शरीर का निर्माण हुआ है , उसे अगर तुम स्वर्ग की भूमि से हल्का समझोगे तो उस पर पॉव रखने का भी तुम्हे कोई अधिकार नहीं है ।जिस भूमि से तुम्हारा अपरिमित कल्याण हो रहा हो उसे तुच्छ मानकर स्वर्ग का गुणगान करते रहना एक प्रकार का अज्ञान है ।

“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदिर्पि गरीयसी”

आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

लिखने मे ग़लती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

4 Comments Add yours

  1. स्वर्ग की आकाँक्षा नही बल्कि अपनी मातृ भूमि की पूजा करनी चाहिये क्योकि मा तो मा होती है।
    एक ज्ञान जिंदगी बदल सकता है।
    धन्यवाद आपका तहे दिल से जो हमे आपने अवगत कराया।

    Liked by 1 person

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सराहने के लिये

      Like

  2. Madhusudan says:

    waah…..dil ki baat kah di aapne…….jis dharti par hamen hawa paani aur pet bharne ko ann mile us dharti ko chhod kisi aur dharti ya swarg,jannat ki baat karna ek tarah se us dharaa to tuksh samjhna hi hai…..use swarg mile naa mile dharti par rahne ka kya auchitya.

    Liked by 1 person

    1. सही बात है ….बहुत बहुत शुक्रिया

      Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s