लफ्ज # 49,50,51

1. खुशियों के लिए क्यों करे

किसी का इंतज़ार,

हम ही तो हो अपने

जीवन के कलाकार ।

2. ख़ुशियाँ मिले ना जंगल में,

ना मिलें शहर ,गॉव ,हाट बाजार मे

अपने भीतर ढूंढ लो

मिल जायेगी दिल की छॉव मे ।

3. ना खुशी खरीद पाता हूँ

ना गम बेच पाता हूँ,

फिर भी ना जाने क्यूँ ?

हर रोज कमाने निकल जाता हूँ ।


लफ्ज कितने भी खुबसूरत क्यों ना हो ,

निखार तो तब आता है जब आप सब रिप्लाई करते हो 😃😃

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

4 Comments Add yours

  1. Deepti says:

    Very nice post mam

    Liked by 1 person

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