सभी से एक नम्र निवेदन # जिंदगी की किताब (पन्ना # 376)

सभी से एक नम्र निवेदन …..आज तक जितने लेख ,कविता या जो कुछ भी लिखा ,उसको आप सबने पसंद किया उसके लिये सभी को तहें दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ ।

मेरा ज्ञान अपूर्ण है । जो कुछ भी आज के माहौल मे हो रहा है उसको देखकर या अपने मन मस्तिष्क मे उमड़ते विचारों को पढ़कर आपके समक्ष लेखनी के माध्यम से परोसती हूँ । इसके अलावा महान विचारकों या ज्ञानी पुरूष ,संतजनो का सुनकर या पढकर ,मनन करके आप सबसे शेयर करती हूँ ।

किसी बात को कहने मे ग़लती हो जाती है या किसी की आत्मा क़बूल नहीं करती है तो जो भी उसमें उपयोगी या हितकर लगे उसे ग्रहण कर सकते है ।जैसे हंस समुद्र की आती अनेक तरंगों मे से कुछ तरंगों से मोती को खोज लेता है वैसे ही आप सभी भी अच्छी बातें स्वीकार करके शेष बातों का त्याग कर दिया करे ।

मैं भी हंसवृति की ह्रादिक कामना करती हूँ ,मुझमें ऐसी शक्ति आये जिससे सभी के मोती समान सद्गुणों को ग्रहण कर सकूँ

मैंने भी आज तक जितनी अच्छी बातें सुनी,पढी या देखी ,उन सबका पूर्ण रूप से पालन नहीं कर पा रही हूँ । अभी भी बहुत कमियॉ है जिसे मिटाने के लिये प्रभु से प्रार्थना करती हूँ

मुझे हर विषय पर लेख पढ़ना अच्छा लगता है ।आप सभी के हर प्रकार के लेख पढकर कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है इसलिये आप सभी के लेख का तहें दिल से स्वागत करती हूँ ।

आपका सहयोग ऐसा ही बना रहे व हमेशा हौसला बढ़ाते रहे ऐसी आप सबसे विनती है ।

धन्यवाद 🙏🙏

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

4 Comments Add yours

  1. विद्या ददाति विनयम्।।। आप इस सत्कार्य में इसी प्रकार संलग्न रहें।

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    1. हौसला बढ़ाने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🙏

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  2. Madhusudan says:

    PURV KE BHANTI SWAGAT APKA…….AAP JITNA LIKHTI HAIN BAHUT ACHCHHA LIKHTI HAIN….BHUKH TO RAHNA HI CHAHIYE.

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    1. धन्यवाद हौसला बढ़ाने के लिये

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