घड़े से कुछ सीखे # जिंदगी की किताब (पन्ना # 382)

जो इंसान कष्टों को चीरकर बिना घबराये आगे बढ़ता है वही आगे जाकर महापुरूष , विशिष्ट पुरुष , लोकपूज्नीय बनता है । आगे बढ़ने के लिये सहनशीलता भी जीवन की अमूल्य सम्पदा है ,निधी है । ऐसे इंसान को कोई पराजित नहीं कर सकता , हर क्षैत्र मे उसकी जीत होती है ।

एक व्यक्ति घड़े को ख़रीदने गया और बजा बजाकर देखने लगा कि कौनसा घड़ा सर्वश्रेष्ठ है । एक घड़ा बहुत पसंद आया और उसकी तारीफ़ करता हुआ बोला कि घड़ा वाकई तु सिर पर बैठाने के लायक है । सुनकर घड़ा बोला कि मान्यवर आप जो मेरी तारीफ़ कर रहे है ,आपको मालूम नहीं कि मुझे यहॉ तक पहुँचने के लिये किन किन तकलीफो का सामना करना पड़ा । सब तकलीफ़ों को सहन करने बाद मुझे सिर पर बैठाने की बात आई है ।

मुझे सबसे पहले अपनी जगह छोड़नी पड़ी । फिर मुझे गधे या ट्क पर रखा गया । फिर पीट पीट कर सीधा किया गया । बाद मे चाक पर चढ़ाया गया । सिर को काटकर धड़ पर रखा गया । सर्दी और गर्मी को सहन करना पड़ा ।अवाडे मे रखा गया । फिर मुझे बाहर निकाला गया । मेरा रूप का परिवर्तन हुआ ।आकृति निखरी । फिर मुझे दुकान मे सजाकर रख दिया वहॉ पर भी मुझे ठोक बजाकर परखा गया । फिर ख़रीदा गया । इतने अधिक कष्टों के सामने मैंने अपनी तनिक सहनशीलता नहीं खोई, ग़म खाया कष्ट सहता रहा , शांत रहा तब जाकर लोगों के मस्तक पर चढा और बैठा ।

सभी चित्र गूगल के माध्यम से लिये गये है

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

4 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    ghade ke madhyam se kyaa khub sandesh diya apne……bahut khub.

    Liked by 1 person

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपको लेख अच्छा लगा

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