अन्तर्ध्वनी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 386)

अन्तर्ध्वनी ….

हमारे अंदर की अनेक त्रुटियों मे से एक त्रुटि ये भी है कि हम कभी भी अपनी अन्तर्ध्वनी की और कान नही देते । अंतरात्मा जिस बात को बार बार पुकार कर कहती है ,उसे सुनने व समझने की और हमारा ध्यान नही जाता ।यदि इंसान अपनी अंतरात्मा की सुने तो वह कभी भी कर्तव्य से विमुख नही होगा ।

कोई अपने आप को बुरा या पापी कहलाना पसंद नही करता । यदि वह अन्तर्नाद की और ध्यान दे तो वह दूसरों के लिये भी बुरा नही सोचेंगा ।

इसलिये कभी भी बाहर की आवाज पर ना जाकर भीतर की आवाजपर जाये व निर्णय ले ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    Bilkul antarman se nikli awaaj kabhi dhokha nahi deti.

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    1. सही है ….बहुत बहुत शुक्रिया

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