नव वर्ष पर # जिंदगी की किताब (पन्ना # 388)

ैकुछ खट्टी कुछ मीठी यादों के साथ ,

जिन्दगी की किताब का एक और पन्ना कम हो रहा है ,

सुलभ डोर से फिर एक मोती झड़ रहा है ,

एक और दिसम्बर गुजर रहा है !
कुछ चेहरे घटे,कुछ चेहरे बढ़े ,गुजरे व
जुड़ी ,कुछ हटी ,

उम्र का पंछी नित दूर और दूर उड़ रहा है ,
फिर एक और दिसम्बर गुजर रहा है !

जाड़ों की सुहानी धूप
rong> गुजरे लम्हो पर झिना सा पर्दा गिर रहा है ,फिर एक और दिसम्बर गुजर रहा है !जीने का जायका लिया भी नही ,

और फिसल रही है जिन्दगी ,
आसमान समेटता वक्त बादल बन कर उड़ रहा है ,

फिर एक और दिसम्बर गुजर रहा है !

कितना जीया
/strong>

कैसे जीया उस पर विचार ना किया ,फिर एक और दिसम्बर गुजर रहा है !

जिन्दगी के जायके का मजा कुछ ऐसे ले ,

आपस मे संबंधों की कटुता को मधुरता की और मोड़े ,

हँसे और औरों को हँसाये

मिठाई की तरह खुशियॉ को बॉटेअच्छे कर्म और धर्म से नाता जोड़े ।

आओ नये साल का स्वागत करे ,

दिल से कोई भी एक नया प्रण ले ।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    बिल्कुल सही।।इस साल की गलती अगले साल में ना हो।।

    Liked by 1 person

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