आत्मशक्ति # जिंदगी की किताब (पन्ना # 392)

आत्म शक्ति ….

यह शरीर आत्मा के सहारे ही टिका है ।शरीर मे जो कुछ भी होता है वह वह सब कुछ आत्मा की शक्ति के बदौलत होता है । ये सब कुछ चर्म चक्षुओ से नही बल्कि अपने भीतर गहराई से उतरने पर महसूस होगा ।

आत्मा तो अनंत शक्ति वाला है पर इस शक्ति का ह्वास लोगों की दिनों दिन मानसिक चिंता बढ़ने की वजह से होता जा रहा है । उसे विकसित करने का रास्ता भूल गये ।इस वजह से ये शक्ति दब गई । इसके अतिरिक्त इस संसार मे जितने भी आराम के साधन उपलब्ध हो रहे है ,उतनी ही आत्मिक शक्ति नष्ट हो रही है ।

आत्म शक्ति मे इतनी अद्भुत जबरदस्त शक्ति है कि इस संसार मे उथल पुथल कर सकती है । जिस विज्ञान ने आज संसार को कुछ का कुछ बना दिया उसके मूल मे आत्मा की ही शक्ति है ।इसके बिना तो संसार मे एक मिनट भी काम नही चल सकता । विज्ञान की चकाचोँध मे हमे इसके ही निर्माता (आत्मा ) को नही भूलना चाहिये । जैसे सांइस मे रूचि रखते है वैसे आत्मा के प्रति ज़्यादा नही तो कम से कम उसे जानने की उत्सुकता तो रख सकते है । साइंस को पहचानते हो तो आत्मा को भी पहचानने की कोशिश करे व उसे विकसित करने की कोशिश करे ।

आत्म शक्ति का विकास करने के लिये –

आत्मा से “विकार शक्ति “को जैसे जैसे कम करते जायेंगे ,वैसे वैसे आत्मिक शक्ति का अविर्भाव होता जायेगा ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    umda lekhan…..bahut khub.

    Liked by 1 person

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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