वास्तविक स्वभाव मे रमण करे # जिंदगी की किताब (पन्ना # 397)

वास्तविक स्वभाव मे रमण करे तो जिन्दगी जीना सहज होगा वह भी एक सकुन के साथ ।

हर इंसान मे कुछ ना कुछ विशेष गुण (अच्छा गुण ) जरूर होता है , यदि वह इस विशेष गुण को किसी भी स्थिति मे बरकरार रखे तो वह अपना ध्येय आसानी से पूरा करने मे समर्थ हो जाता है ।

यदि व्यावहारिकता मे सामने वाला इंसान हमारे साथ बुरा व्यवहार करता है , तो उसके बुरे व्यवहार का अनुकरण ना करके ,हमें अपने वास्तविक स्वभाव यानि अच्छाई पर अडिग रहना चाहिये । हम अपनी मूल अच्छे स्वभाव को दूसरे के चक्कर मे क्यो छोड़े ?

एक दृष्टांत से हम अच्छा समझ सकते है …

एक व्यक्ति नदी मे नहाने गया । वहॉ पर उसने देखा कि एक बिच्छु पेड़ से गिरकर नदी मे गिर गया और तडपने लगा । उसे देख कर उस आदमी के ह्रदय मे दया का भाव आया व उसका दिल तड़प उठा । उसने एक पता लेकर जैसे ही बिच्छु को उठाया ,उसने डंक मार दिया । डंक लगते ही उस व्यक्ति का हाथ हिल गया और बिच्छु पानी मे गिर गया और वैसे ही तडपने लगा । दयावान होने के कारण उसने फिर बिच्छु को पता लेकर उठाया तो बिच्छु ने फिर से डंक मार दिया और फिर हाथ हिलने से बिच्छु पानी मे गिर गया । ऐसा चार पॉच बार हो गया । लेकिन आखिरकार वह बिच्छु को बाहर निकालने मे सफल हो ही गया । वहॉ तट पर खड़ा व्यक्ति काफी समय से ये सब देख रहा था ,उसे रहा नही गया और उसने उस व्यक्ति से पूछ ही लिया कि ये बिच्छु तुम्हें बार बार काट रहा था फिर भी तुम उसे बार बार निकालने का प्रयास कर रहे थे ,क्या इसमें कोई रहस्य है । तो वह आदमी बोला कि जब यह अपने स्वभाव को नही छोड़ता तो मैं अपने स्वभाव को कैसे छोड़ सकता हूँ । दुर्जन अपनी दुर्जनता नही छोड़ता तो सज्जन अपनी सज्जनता कैसे छोड़ देगा ?

जो इंसान दुर्जन के साथ भी सज्जनता का व्यवहार करता है । बुरे के साथ भलाई का व्यवहार करता है ,वही पुरूष संत पुरूष कहलाता है ।

निर्जीव वस्तु भी अपना गुण नही छोड़ते ,जबकि हम तो सजीव है ।चंदन कभी भी अपनी महक की विशेषता नही खोता ,चाहे कोई भी स्थान हो , बल्कि वह जहॉ जाता है उस जगह को भी महका देता है । इसी तरह गुड अपनी मिठास , केसर अपनी खुशबू , फूल अपनी सुगंध , बर्फ अपनी ठंडक, ….यानि कि जिसमें भी अपना वास्तविक गुण होता हैवह कभी नही छोड़ता ।

हमारे मे जन्म से ही जो अच्छाईयॉ है , मूल स्वभाव है उसको बरकरार रखे ।

लेकिन अधिकांश लोग दूसरों की कॉपी करने मे अपनी वास्तविक गुण से एकदम परे हो जाते है या कह सकते है कि उनका व्यक्तित्व भेड़ चाल वाला हो जाता है ।

कॉपी पेस्ट करे अच्छी बातों का ,ना कि बुरी बातों का ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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