पागल कौन ? # जिंदगी की किताब (पन्ना # 399)

पागल कौन ?यदि किसी व्यक्ति को दूसरे की बोली गई बात पसंद नही आती है तो वह उसे “पागल है “ अक़्ल नही है ..कहकर हँसी उड़ा देता है ।

क्या दुनिया जिसको पागल कहती है वह सचमुच पागल होता है ?

सुप्रसिद्ध विचारक ख़लील जिब्रान की एक अच्छी उक्ति देखिये –
“पैसे लेकर मैं अपना समय नही बेचता , इसलिये लोग मुझे पागल कहते है , परंतु मेरे
इसलिये मैं उन्हें पागल समझता हूँ ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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