मनुष्य की कीमत # जिंदगी की किताब (पन्ना # 311)

कभी कभी इंसान अपने आप से इस क़दर हार जाता है कि वह अपने आप को मूल्यहीन समझने लगता है पर ऐसा सही नहीं है । हर इंसान में कुछ ना कुछ खूबी या विशेषता ज़रूर होती है ,जरूरत है तो उस ख़ूबी को पहचानने की ।

ठीक एक लोहे की छड़ की तरह – एक आदमी लोहे की छडे बेचने का काम करता है ,जिसकी कीमत प्रति छड़ 250 रूपये है । उसी दुकान से एक व्यापारी आकर एक छड़ खरीदता है व उस छड़ से पतले पतले तार बना कर बेचता है ।जिसकी कीमत पन्द्रह सौ रूपये हो जाती है । एक अन्य व्यापारी वही से एक छड़ खरीदता है व उसी छड़ से मशीन के छोटे छोटे पुर्जे बनाकर बेचता है ,जिसकी कीमत लाखों मे हो जाती है । आपने देखा कि कम कीमत की लोहे की साधारण छड़ को तराश तराशकर कितना कीमती बना दिया ।

ऐसा ही हम सबके साथ है ।हम इंसान की कीमत इसमें नही है कि अभी क्या है बल्कि इसमें है कि हम अपने आप को क्या बना सकते है ।अक्सर हम अपनी वर्तमान स्थिति को देखकर अपनी सही कीमत ऑकने मे गलती कर देते है व मूल्यहीन समझने लगते है जबकि वास्तविकता मे हर इंसान का जीवन अनमोल होता है उसके पास अथाह शक्ति होती है ,जरूरत है अपने आप को सही ऑकलन करने की व सही दिशा मे बढ़कर अपनी खूबी को तराशने की ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

    1. बहुत बहुत शुक्रिया

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