अमूल्य श्वासों की कीमत पहचाने जिंदगी की किताब (पन्ना # 321)

अमूल्य श्वासों की कीमत पहचाने ,एक एक श्वासों की कीमत कीजिये

मान लो यदि हमे कोई इंसान उपहार मे ऐसी वस्तु देता है जिसका हमे मालूम नही है कि उसका उपयोग कैसे करना है तो वह वस्तु हमारे लिये व्यर्थ हो जायेगी । इसी तरह हमे भी ईश्वर द्वारा एक अमूल्य उपहार मिला है वह है श्वासे , जो हमारी जिन्दगी है , जिसके बंद होते ही जिंदा इंसान लाश बन जाता है । हम समझ नही पाते है कि इस अमूल्य श्वासों के रहते हम क्या क्या कर सकते है ,उसको व्यर्थ ही गँवा देते है ।

जैसे जैसे जिंदगी के दिन बढ़ते है वैसे वैसे श्वासे की डोर कम होती जाती है , ना जाने कब श्वासों का पंछी शरीर से निकलकर हमेशा के लिये उड़ जाये , उसके पहले ही हमे मनुष्य जीवन पाने का लाभ उठा लेना चाहिये ।

अधिकांशतया हम अपनी जिन्दगी दूसरों की कॉपी करने मे या दूसरों के हिसाब से जीने मे , चिंता करके , दिखावे मे , चुगली , निंदा करने मे , कौन क्या कर रहा है उस पर नजर रखने मे ,टी. वी . ,सॉशियल मीडिया , मौजमस्ती , गपशप करने मे …. आदि और भी चीजो मे व्यतीत कर देते हो जो सिर्फ समय की बर्बादी के अलावा कुछ भी नही है ।

हमे फ्री ऑफ कॉस्ट श्वासे मिली है इसलिये इसकी कीमत समझ नही आती है । अगर श्वासों की कीमत जाननी है तो उन लोगों की तरफ नजर डाले जो अस्पताल मे आ. सी . यू . , व वेंटिलेटर पर एक एक श्वास के लिये तड़फ रहे है और ईश्वर से दुआ कर रहे है कि हे प्रभु मुझे थोड़ा सा और वक्त दो ताकि मैं अपनी जिन्दगी जी सकूँ ,अमुक कार्य पूरा कर सकूँ , आपकी भक्ति मे समय बिता सकूँ …. । वह सारी पूँजी भी दे तो भी एक क्षण की श्वास नही खरीद पाता है

हमे ईश्वर से जो श्वासे उपहार स्वरूप मिली है उन श्वासों का हर सैकंड का सदुपयोग करना है ।

हमे अपने कर्तव्य पूरे करते हुये अपने लिये भी जीना है यानि अपनी रूचि के अच्छे कार्यों को पूरे उत्साह से नफ़ा नुक़सान के बगैर सोचते हुये करना है । जिसे दिल मे एक अलग प्रकार की खुशी व सकुन मिलेगा,आत्मसंतुष्टी मिलेगी ।

हर समय ये सोचे कि मैं स्वयं अच्छे कार्य करूँ व दूसरों को भी अच्छे कार्य के लिये प्रोत्साहित करूँ व सबकी दुआये कमाऊँ । सत्संग , प्रभुस्मरण , यथा योग्य जग कल्याण का काम ….. ऐसे अनेक पसंद के कार्य जिसको करते हुये हमे स्वयं महसूस हो कि हमने मनुष्य जिन्दगी को सार्थक किया है , कुछ अच्छा काम किया है ।

हर बात के लिये , हर श्वास के लिये ईश्वर को धन्यवाद देना ना भूले । हर क्षण मन मे ऐसी प्रार्थना करते रहना है कि हेईश्वर मुझे उन सभी बातों से परिपूर्ण कर दो जिन बातों से दूसरों की जिन्दगी मे खुशियॉ के फूल खिले , शांति मिले , आनंद मिले ।

इसलिये हम अपनी हर श्वास का उपयोग जिंदगी के हर क्षण को आनंद व शांति से जीने के लिये करे। हर रोज ईश्वर से दुआये मॉगे कि हे ईश्वर सबके दुख दर्द मिटे । सभी की जिन्दगी मे खुशियॉ आये ।

आप सबकी भी जिन्दगी मे भी आनंद , मंगल व ढेरों खुशियॉ आये । ऐसी ईश्वर से दुआये है।

आपकी आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bahut hi khubsurata vichar.

    Liked by 1 person

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