जानिये जिन्दगी के मूलमंत्र व व्यक्तित्व के बारे मे कुछ विचार …. # जिंदगी की किताब (पन्ना # 325)

जानिये व्यक्तित्व के बारे मे कुछ विचार ….

जिन्दगी मे सफलता पाने के लिये व्यक्तित्व का भी बहुत बड़ा हाथ है ।हर व्यक्ति का अलग अलग तरह का व्यक्तित्व होता है ।कोई व्यक्ति बाहरी व्यक्तित्व का होता है तो कोई भीतरी व्यक्तित्व का धनी तो कोई दोनो तरह का ।

जानिये व्यक्तित्व के विषय मे कुछ विचार ….

1. मनुष्य का भीतरी व्यक्तित्व उसके जीवन की जड़ है ,यदि भीतरी व्यक्तित्व कमजोर होगा तो बाहरी व्यक्तित्व का कोई भी महत्व नही रहेगा यानि बाहरी व्यक्तित्व धरा का धरा रह जायेगा ।

2. यदि हम किसी के छोटे से कमेंट्स या दुर्व्यवहार से विचलित हो जाते है , अपसेट हो जाते है तो इसका मतलब हमारे अंदर भीतरी व्यक्तित्व का अभाव है ।

3. दूसरों की बातों पर ध्यान देकर ही हम उन्हें वह शक्ति देते है , जहॉ से वे हमे विचलित कर सके ।

4. जीवन मे सफलता वस्तुओं को नही बल्कि इंसान को मिलती है । जिस दिन से हम अपना महत्व व अपनी ऑरिजनल पर्सनलिटी को भूलकर दूसरों को महत्व देते है तो हमारी स्थिती एक वस्तु की तरह हो जाती है जो सफलता मे बाधक है ।

5. मालिक बनना है तो स्वयं का बनिये , जो स्वयं का मालिक बन जाता है , वह अपने आप एनर्जी से भर जाता है । यहॉ तक कि दूसरों का मालिक बनने की ताक़त भी पा लेता है ।

6. मन की आदत है कि वह हमेशा दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करता है । लेकिन सूक्ष्म मे देखा जाये तो पता चलेगा कि जितना हम दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते है , उतना ही हम दूसरों से प्रभावित होते है ।

7. संबंधो मे बढ़ती कटुता का एक कारण यह भी है कि अधिकतर इंसान बाहरी व्यक्तित्व का मुखौटा पहनकर रिश्ते को कायम रखने की कोशिश करता है ।

8. रिश्ते क़ायम रहने का मुख्य कारण इंसान भीतरी व्यक्तित्व का धनी होता है ।भलई वह इंसान बात करने मे कच्चा हो लेकिन व्यवहारिकता मे पक्का होता है ।

9. बाहरी व्यक्तित्व रखने से भीतरी प्रेम ख़त्म होता जा रहा है । इसीलिये आजकल कहा जाता है कि रिश्तो को जितना क़रीब से ना जानो उतना अच्छा है ।

10. बाहरी व्यक्तित्व रखने वाले इंसान की छवि भलई कुछ समय के लिये अच्छी बन जाती है परंतु जैसे ही हकीकत मे व्यवहार का कार्य होता है तो वह अव्यवहारिक हो जाता जिससे उसकी बातों पर विश्वास नही रहता व धीरे धीरे उसकी छवि धूमिल होती जाती है ।

11. जितने भी संत,महात्मा या महापुरूष हुये है वे सब भीतरी व्यक्तित्व के धनी थे ।उन्होने कोई भी कार्य लोगो को प्रभावित करने के हिसाब से नही किया बल्कि अपने विशेष गुण को इस क़दर बढ़ाते रहे कि बिना बताये उसका प्रभाव लोगो पर पड़ता गया ।

12. बाहरी व्यक्तित्व रखने का परिणाम यह होता कि व्यक्ति धीरे धीरे अपनी असली छवि को भूल कर किसी और की छवि बन जाता है । या यूँ कह सकते है कि अपनी जिन्दगी ना जीकर दूसरों के हिसाब से अपनी जिन्दगी व्यतीत कर लेता है ओर उसका मनुष्य जीवन निरर्थक हो जाता है ।

इसलिये अभी भी देर नही हुई है । अपने गुणों को विकसित करो , अपने को मजबूत बनाओ ,अपने हिसाब से जीओ ना कि दुनिया के हिसाब से । फिर देखना आपको आंतरिक खुशी तो मिलेगी ही साथ मे सफलता भी आपके कदम चूमेगी ।

भीतरी व्यक्तित्व को करो मजबूत

सफलता होगी कभी नही दूर


आपकी आभारी विमल विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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