वाकपटुता # जिंदगी की किताब (पन्ना # 329)

जिन्दगी मे वाकपटुता होना बहुत जरूरी है ।

एक बार कुछ छात्र महात्मा गाँधी से मिलने आये ।गाँधी जी ने बहुत व्यस्त कार्यक्रम मे से भी उन छात्रों के लिये कुछ समय निकाल ही लिया । छात्रों ने उस समय बापू से अनेक तरह के प्रश्न किये । बापू ने सब प्रश्नों का बहुत संक्षिप्त सारगर्भित उत्तर दिये । उत्तरों से संतुष्ट होकर भी एक चंचल छात्र ने पूछा – बापू जी आपके उत्तर बहुत संक्षिप्त है , जबकि कर्मयोगी श्रीकृष्ण ने अर्जुन के प्रश्नों का उत्तर सात सौ श्लोकों की गीता के रूप मे बहुत विस्तार से दिया था ।

उसके उत्तर मे बापू बोले कि श्रीकृष्ण के सामने एक अर्जुन था और मेरे सामने साठ अर्जुन है । क्या करूँ ?

सभी छात्र इस उत्तर से बहुत प्रसन्न हुये , वाकपटुता इसी को कहते है ।

कम अक्षरों मे सुंदर बात जो कह सकता है , वह निश्चय ही कुशल वक्ता है । इससे विपरित जो कम सार वाले बहुत से वाक्य कहता है , वह बकवादी है , प्रलापी है ।

आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    sahi kaha……..ese hi waqpatuta kahte hain……kam shabd……..asar jyada.

    Liked by 1 person

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