पहचानिये अपनी प्रकृति को (वात , कफ पित ) # जिंदगी की किताब (पन्ना # 344)

पहचानिये अपनी प्रकृति को (वात , कफ पित )…

मनुष्य की प्रकृति वात , कफ , पित इन तीनों शक्तियों से मिलकर बनी है । नीचे हर एक प्रकृति की दो सारणियॉ दी गई है । सारणियों से अपनी अपनी प्रकृति पहचाने । हर प्रकृति की पहली सारणी के अनुसार अपनी प्रकृति से संबंधित लक्षणों को पहचानिये व तीनों के कुल गुण गिनिये । वात शक्ति गुणांक अगर अधिक हो तो वातप्रधान प्रकृति है । पित शक्ति अगर अधिक हो तो , पितप्रधान प्रकृति है व कफ शक्ति अधिक हो , तो कफ प्रधान प्रकृति मानना चाहिये ।दूसरी सारणी मे प्रत्येक प्रकृति (वात कफ ,पित)का गुणांक पहली सारिणी की शक्ति के आसपास हो , तो प्रकृति का दोनो शक्तिप्रधान माने । संयोग से इन तीनों शक्तियो का गुणांक समान हो तो सम प्रकृति मानिये । अपनी प्रकृति की पहचान हो जाने पर भिन्न प्रकृति के व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के लिये आहार इत्यादि कैसे रखे , इसके बारे मे आयुर्वेद ने जो मार्गदर्शन किया है , वह दूसरी सारिणी मे संक्षेप मे दिया गया है ।

मनुष्य की वात प्रकृति

शरीर रचना – कृश

बाल – सूखे ,विरल

त्वचा- रूखी सूखी

निद्रा – कम और टूटने वाली

वजन -कम व वृद्धि जल्द ना होना

भूख – कभी तीव्र कभी साधारण

स्मरण शक्ति – ग्रहण शक्ति तीव्र मगर स्मरणशक्ति अल्प समय के लिये

चापल्य – बहुत,सतत उत्साह

सहनशीलता – कम

एकाग्रता – कम

आहार – मधुर , खट्टा, नमकीन, पौष्टिक उष्ण प्रदार्थ

व्यायाम – हल्का ,प्रात: भ्रमण इत्यादि

दिनचर्या – तेज़ मसाज , गर्म कपडे , भरपूर आराम

ऋतु – …..

निषेध

आहार – कषाय , कड़वे प्रदार्थ ,कम खाना

दिनचर्या – लगातार ठंडे वातावरण के संपर्क मे न रहे व जागरण न करे

ऋतु – जाड़े मे अधिक ध्यान दे


मनुष्य की पित प्रकृति

शरीर रचना -मध्यम ,प्रमाणबद्ध

बाल – विरल व जल्दी सफेद होना

त्वचा – मुलायम

निद्रा – ठीक परंतु गहरी नही

वज़न – प्रमाणबद्ध

भूख – अतिशय तीव्र

स्मरण शक्ति – उत्तम

चापल्य – कार्यक्षम

सहनशीलता – मध्यम

एकाग्रता – मध्यम

आहार – मधुर ,कषाय,कटु शीत प्रदार्थ

ऋतु – जाड़ा

व्यायाम – खेल , तैरना इत्यादि

दिनचर्या – हल्के सूती कपडे , नियमित समय पर भोजन

निषेध

आहार- उष्ण ,तीखे ,नमकीन प्रदार्थ, कम खाना

ऋतु – धूपकाल मे अधिक ध्यान दे

दिनचर्या – धूप मे न फिरे ,सतत उष्ण वस्तुओं से संपर्क न करे


मनुष्य की कफ प्रवृति

शरीर रचना – सुदृढ़

बाल – घने मुलायम

त्वचा – चिपचिपाहट, मुलायम

निद्रा – शांत व स्वस्थ

वज़न – वज़नदार व जल्दी वृद्धि न होने की प्रवृति

भूख – भूखे रहने पर विशेष तकलीफ़ नही होना

स्मरण शक्ति – स्मरण शक्ति अच्छी

चापल्य – शांत व संयमशील

सहनशीलता – बहुत सहनशील

एकाग्रता – उत्तम

आहार – कषाय ,कड़वे व तीखे प्रदार्थ , हल्का आहार

ऋतु – धूपकाल

व्यायाम – भरपूर व्यायाम

दिनचर्या – कम खाना , मर्यादित निद्रा

निषेध

आहार – पौष्टिक , मधुर, खट्टे प्रदार्थ कम खाये

ऋतु – बारिश तथा जाड़े मे कम अधिक ध्यान दे

दिनचर्या – पानी से संपर्क तथा दिन मे नींद न ले


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    Bahut khub jankari.

    Liked by 1 person

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