हर गृहिणी की हक़ीक़त # जिंदगी की किताब (पन्ना # 353)

रात को सोने से पहले रसोई को देखना है , सब कुछ ठीक से तो रखा है

फ्रिज मे सामान तो रख दिया है ,कही बाहर गर्मी मे खराब ना हो जाये

दही ज़माना या सुबह के लिये चना राजमा छोले भिगौने है

सुबह अलार्म बजते ही सबसे पहले रसोंई का दरवाज़ा दिखता है ।

बच्चों का टिफ़िन तैयार करना है ,bus stop छोड़ना है

सुबह पति ,बच्चों , मॉ पिताजी व अन्य सदस्यों के लिये चाय दूध ज्यूस नाश्ते की तैयारी करनी है

सबके लिये अलग अलग नाश्ता अलग अलग समय पर लगाना है

लंच मे क्या बनाना है उसकी भी तो तैयारी करनी है

काम वाली बाई को भी बीच बीच मे देखना पड़ता है

पेपरवाला , दूधवाला ,सब्जीवाला , लॉन्ड्री वाले का भी ध्यान रखना है

सबका सामान जगह पर रखना है , बाहर towel सुखाना है

मेहमान आ जाये तो उसकी भी ख़ातिरदारी करनी है

Lunch ख़त्म होते ही थोड़ा सुस्ताऊँ या नही

जितने मे शाम की चाय स्नेक्स व dinner मे क्या बनाना है ,सोचना पड़ता है

हर गृहणी की दुविधा, सुबह और शाम क्या क्या बनाना है

बच्चे लौकी ,टिन्डे ,परवल ,बीन्स नही खाते है

कडवा करेला भी भला खाने की कोई चीज है

पिताजी को शुगर व ब्लड प्रेशर है

कम नमक के साथ आलू व मीठा खाना मना है

माँ को गैस के साथ दॉतो की तकलीफ़ है

दलिया व खिचड़ी उन्हें पसंद नही व बेसन व भिंडी को avoid करना है ।

पति का weight बढ़ ना जाये ,तला भुना व चावल आलू को दूर रखना है

भला सलाद जैसी घासफूस भी खाने की कोई चीज है , खाने को तो tasty food चाहिये

बाहर की वस्तुयें healthy नही होती है ,हर चीज को घर पर पकाना है

सच में ऐसा लगता है, उकता गई हूँ रसोई से

ऐसा नही की मै खाना पकाना नही चाहती

सभी तो अपने है इसलिये सबके लिये बड़े चाव से पकाती हूँ

पर इंसान हूँ , आधा समय रसोई मे रह रहकर

एक ही दिनचर्या से थक सी जाती हूँ ।

पहले पहले तो घबराती थीं, ये सब करना अखरता था

सब पर ग़ुस्से से चिल्लाती थी

बाद मे अपनो के प्रेम स्नेह से सारी थकान भूल सी जाती हूँ

सब accept कर उमंग व enjoy के साथ जीना शुरू कर देती हूँ

अपनी hobby का भी कुछ करती हूँ

अब औरों के साथ खुद के लिये भी जीती हूँ

थक जाने पर ्एक चेयर पर आराम से बैठकर

ऑंखें बंदकर एकदम से relax हो जाती हूँ

💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼

हर गृहिणी की कुछ ऐसी ही कहानी है पर गर्व करो अपने पर क्योंकि

वह परिवार की धुरी है

उसके बिना जिन्दगी अधूरी है ।

Dedicated to all women

😀😀👍👍💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

5 Comments Add yours

  1. शत प्रतिशत सत्य विवेचन किया है आपने। वर्तमान परिस्थितियां ज्यादा विकट होती जारही हैं। गृह कार्यों के साथ रोजगार/जाॅब सम्बन्धी जिम्मेवारियां भी वहन करती हैं।

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    1. सही कहा आपने , घर की ज़िम्मेदारी के साथ जॉब करना आसान नही है …पसंद करने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद

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  2. Madhusudan says:

    सुबह उठते ही हाथों में झाड़ू देर रात को अंत मे खाना यही है गृहणी की जिंदगी।सबकी फिकर सभी अपने ही हैं।

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    1. सही कहा आपने .. सभी अपने है तभी को फ़िक्र है

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