रिश्तो की मधुरता # जिंदगी की किताब (पन्ना # 355)

शिल्पी और उसकी सास में किसी बात पर जोरदार बहसबाजी हो गई व बढते बढ़ते झगड़े का रूप ले लिया । गुस्से मे बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक साथ न रहने की कसम खा ली ।शिल्पी ने अपने कमरे में जा कर गुस्से से एकदम दरवाजा बंद कर लिया ,वही दूसरी और सासूमॉ अपने कमरे मे जाकर गुस्से से पलंग पर बैठ गई ।

थोड़ी देर बाद सासूमॉ के कमरे के दरवाजे पर खट-खट की आवाज हुई। वह ऊँची आवाज में बोली कौन है ? दूसरी और आवाज आई कि मॉ मै हूँ ।

सासूमॉ ग़ुस्से से शिल्पी को देखते हुये बोली कि अभी तो अलग रहने की क़समे खाई है ।अब क्या करने आई हो ?

शिल्पी ने कहा Sorry मॉ ! मुझे ग़ुस्से मे कुछ भी मालूम नही चला और आपको बिना ध्यान रखे कुछ भी बोल दिया परंतु बाद मे विदाई के समय मेरी माँ की कही हुई एक बात याद आ गई कि जब कभी भी किसी से कहासुनी हो जाये तो गुस्से मे कोई भी कदम उठाने से पहले उसकी अच्छाइयों को याद कर लेना और मैंने वही किया । आपके द्वारा दिये गये प्यार व आपकी अच्छाईयों को याद करते ही आपस की झगड़े वाली सारी बाते भूल गई ।

मॉ आपने मुझमे व ननद जिया मे कभी फर्क नही समझा । मुझे याद है कि जब मै एक बार बहुत बुखार से तप रही थी तो आपने मेरा कितना ख़्याल रखा । पूरी तरह से ठीक नही होने तक आपने मुझे पलंग से नीचे उतरने तक नही दिया , मेरे सिर पर रात भर ठंडे पानी की पट्टी की ….मै ये सब कैसे भूल सकती हूँ जो आपने मेरे लिये किया । आपने पर्याप्त स्वतन्त्रता दी , mother in law होकर भी आपने अपने law मुझ पर थोपने की कभी भी कोशिश नही की और मॉ आप मे सबसे बडी खासियत यह है कि आपने काम से ज्यादा मेरी भावनाओ का आदर किया ।इतनी अच्छी सास से भला मै कैसे अलग हो सकती हूँ …

आपकी अच्छी बातें याद आते ही मेरा दिल भर गया । मैं ज्यादा देर तक आपसे कैसे गुस्सा रह सकती हूं। मुझे बहुत बुरा लग रहा है कि मैंने आपसे तेज आवाज मे बात की ।

बस फिर क्या था , सास व शिल्पी दोनो भाव विभोर हो गये। सासूमॉ का गुस्सा एकदम शांत हो गया और शिल्पी पर ढेर सारा प्यार उमड़ पड़ा और बोली बेटी तुम तो अभी बच्ची हो लेकिन मैं तो तुमसे बहुत बड़ी हूँ ,मुझे तो बड़प्पन रखना चाहिए था । मुझे ही तुमसे प्यार से बात करनी चाहिए। तुम तो बहुत अच्छी हो । बेटा मुझे माफ़ कर दो जो तुम पर चिल्लाई । दोनों की आंखों में प्यार के आंसू छलक आये ।

मम्मीजी मै आपके लिये गर्म गर्म कॉफी बनाकर लाती हूँ और दोनो ने साथ बैठकर कॉफी पी ।

मॉ आज शाम को आप अपने हाथ के बने गोभी के special पराँठे बनाकर खिलायेगी ना ? क्यो नही बेटा ,तु बोले और मै नही खिलाऊँ ऐसे कैसे हो सकता है….

गुस्साआने पर यदि इंसान दो मिनट के लिये भी शांत हो जाता है तो बडा अनर्थ होते होते रूक जाता है वरना जलती लकड़ी पर पानी की बजाय घी डालने पर जो स्थिती होती है वही स्थिती आदमी की होती है यानि की अग्नि बुझने की बजाय और तेज हो जायेगी । गुस्से से गुस्सा शांत नही होता बल्कि और भड़क जाता है ।

गुस्से को काबू मे रखते हुये संयम व बडा दिल रखे ।

जीवन में किसी का दिल ग़ुस्से से नहीं बल्कि प्यार अपनापन व स्नेह से जीता जा सकता है ।

चाहे बडा हो या छोटा ,कोई भी उम्र का समझदार इंसान बड़ी से बड़ी बिगड़ती स्थितियों को भी बिना गुस्से के प्रेम के दो शब्द बोलकर भी संभालने की ताक़त रखते हैं।


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google

2 Comments Add yours

  1. रिश्तों को बांध के रखे ऐसी कहानी हैं ये

    Liked by 1 person

    1. हॉ , कारण आजकल तेज़ी से परिवार टूट रहे है उसको बचाने की छोटी कोशिश

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