बुढ़ापे मे हाथ पाव जवाब देने लगे # जिंदगी की किताब (पन्ना # 356)

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👌👌जब बुढ़ापे मे हाथ पाव जवाब देने लगते है उस समय बहू घर की कैसे भी साज संभाल करे वो महत्वपूर्ण नही रह जाता बल्कि बेटी की तरह उनकी सेवा करे , ध्यान रखे वो महत्वपूर्ण हो जाता है ।

फिर क्यो ना हम शुरू से ही बहू को बहू ना मानकर एक बेटी की तरह उसके साथ बर्ताव करे , उसके कार्यों मे नुक्ताचीनी व दख़लंदाज़ी ना करे ।

👌👌जब बुढ़ापे मे हाथ पाव जवाब देने लगते है उस समय बहू कपडे कैसे पहनती है , सिर को पल्लू या दुपट्टा से ढकती है या नही ढकती ये कोई मायना नही रखता बल्कि उस समय ऐसा लगता है कि बेटी बनकर उनके हर काम मे सहयोग करे ।

फिर क्यो ना बहू को बेटी की तरह पहले से ही उसके मन पसंद के कपडे पहनने दे ताकि बुढापे मे बेटी की तरह दौड़कर आपके हर काम मे सहयोग करे ।

👌👌जब बुढ़ापे मे हाथ पाव जवाब देने लगते है तब उस समय चाहो या ना चाहो ,बहू अपनी पूरी आज़ादी से आपकी परवाह किये बिना जीती है व आपको मन मसोसकर कर रहना पड़ता है

फिर क्यो ना बहू को बेटी की तरह पहले से ही पर्याप्त स्वतंत्रता दे तो वह बुढ़ापे मे आपकी परवाह करेगी ।

👌👌जब बुढ़ापे मे हाथ पाव जवाब देने लगे व आपको सारे दिन बिस्तर पर लेटे लेटे यह लगे कि कोई घड़ी दो घड़ी पास बैठकर बात करे ताकि अकेलापन व जिंदगी उबाऊ ना लगे ।

फिर क्यो ना बहू से शुरू से ही काम के अलावा उसकी भावना को महसूस करे व दुराव छिपाव किये बग़ैर एक बेटी की तरह दिल खोलकर बात करे तो वह बुढ़ापे मे भी आपसे उसी तरह बात करने की आदी हो जायेगी ।

👌👌जब बुढ़ापे मे हाथ पाव जवाब देने लगे तब ही लोगो के सामने बहू की प्रशंसा व उसकी कार्यो की सराहना करने लगे ताकि बहू खुश होकर उनकी सेवा मे कमी ना डाले ।

फिर क्यो ना हम बहू को पहले से ही एक बेटी की तरह उसकी गलतियॉ को नजरअंदाज करके बाहर लोगो के पास उसकी निंदा की बजाय उसकी अच्छाईयो की प्रशंसा करे तो वह यह प्यार कभी भी नही भूलेगी व आपको बुढ़ापे मे भी सम्मान देने मे कंजूसी नही करेगी ।

♦️यदि शुरू से ही बहू को बेटी की जगह दे और फिर बेटी जैसी होने की आशा रखे तो ऐसा करना कही से भी गलत नही होगा ,क्योंकि बेटी से बहू बनने में कठिनाई आती है लेकिन बहू से बेटी बनने में तो भला क्या दिक़्क़त होगी ?

♦️कम उम्र मे बेटियॉ ससुराल मे मुलायम गीली मिट्टी के घड़े की तरह आती है व उम्र के साथ बहू के रूप मे अपने को तराश कर मजबूत घड़े का रूप ले लेती है

♦️जैसे जैसे बहू की भी उम्र बढ़ती जाती है वैसे वैसे उसे दुबारा बहू से बेटी बनना मंज़ूर नही होता

उस समय बुढापे मे वही राग अलापना होना शुरू हो जाता है लाख कोशिश करो पर बहुएं कभी बेटियाँ नहीं बन सकती ।

♦️याद रहे कि हर स्री बहू के रूप मे भी किसी ना किसी की बेटी तो होती ही है ।

बहू को मान देना मतलब बेटी पर अभिमान करना

picture taken from google


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    बिल्कुल सही कहा।बेटी ही बहु है और बहू किसी की बेटी।जैसा हम आचरण करेंगे फल वैसा ही मिलेगा अपवाद को छोड़कर।

    Liked by 1 person

    1. हॉ सही है …बहुत बहुत धन्यवाद

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