Black n white का जमाना # जिंदगी की किताब (पन्ना # 359)

बडे बुज़ुर्ग की जुबानी

गुजरे जमाने की कहानी

आज भी रूह को छू जाती है

🔘Black n white जमाने मे शर्म से ही चेहरा गुलाबी हो जाता था

Parlour गये बिना ही चेहरा चमकाहट से भर जाता था

जाने क्यो अब parlour जाकर भी वैसा चेहरा चमकाना मुश्किल हो जाता है

🔘Black n white जमाने मे अपनापन का एहसास रहता था

एक दूसरे से खुले दिल से बतियाया करते थे

जाने क्यो अब कोई खुली किताब की तरह क्यो नही बतियाना चाहता है

🔘Black n white जमाने मे बिना कहे एक दूसरे के दिल की बात समझ लिया करते थे।

आपस मे गले लगते ही हालात समझ लेते थे

अब ना जाने क्यो बात या हालात समझाने पर भी नासमझ बन जाते है

🔘Black n white जमाने मे mobile या social media का कनेक्शन नही होने पर भी दिल के तार एक दूसरे से जुड़े होते थे

मात्र चिट्टी से ही दिलों के जज्बात समझ जाते थे

आज technology connection होने पर भी दिल से डिस्कनेकट होते जा रहे है

🔘Black n white जमाने मे भौतिकता के संसाधन कम होने पर भी घर की छोटी सी बगिया मे अच्छे संस्कारों के फूल खिला करते थे

आज भौतिकता मे डूबा इंसान संस्कारो से दूर होकर सदगुरू की बाते को भला क्यो सुनना चाहेगा।

🔘Black n white जमाने मे भाई भाई एक दूसरे की सलाह लिये बिना कोई कार्य नही करते थे

अब भाई भाई कहॉ एक दूसरे की सुनते है

ज़मीन जायदाद के लिये भी झगड़ा कर जाते है

🔘Black n white जमाने मे मॉ बाप के साथ बातचीत मे आदर का भाव टपकता था

उनके पास बैठकर हर बातों को सुना जाता था

अब उनके पास बैठकर घड़ी दो घड़ी बात करने की भी किसके पास फ़ुर्सत है ?

🔘चाहे जो हो Black n white ज़माने मे जिन्दगी colour full लगती थी

आज colour full जमाने मे जिन्दगी रंगहीन लगती है

🔘colour full ज़माना आधुनिक से अत्याधुनिक होता जा रहा है

Practically सोचते सोचते भावनाओं को खाता जा रहा है

अब राजा और परियों की बातें किसे भाती है

अपनो की याद अब किसे रुलाती है

अब गरीब को कौन मित्र बताता है ?

कृष्ण बनकर कौन सुदामा को गले लगाता है ?

जिन्दगी मे कितने प्रेक्टिकल से हो गये है हम

मशीनरी जिंदगी जीने के आदी बन कर रह गये है सब

इसलिये कहा जाता है कि

विज्ञान ने चाहे हर जगह जीत हासिल कर ली है

लेकिन रिश्तो मे वह हार सा गया है


आपकी आभारी विमला विल्सन

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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