एक ऐसा डाईवॉर्स जिसके होने के बाद दिमाग ने नही दिल ने गवाही दी # जिंदगी की किताब (पन्ना # 361)

आज कुछ काम से court मे जाना हुआ , वक़ील साहब के आने मे टाईम था । पास मे बैठे एक व्यक्ति ने बात करते समय बताया कि वह अपनी तलाक की पहली पेशी के लिये यहॉ आया है । तलाक का कारण सुनकर मैने कहा कि आप जैसा ही क़िस्सा मेरे अज़ीज़ दोस्त के साथ हुआ , आपको हुबहू उसकी पूरी detail बताता हूँ फिर सोचना ।

मेरा दोस्त रौनक व परी भाभी की आये दिन छोटी छोटी बातों पर लड़ाई होती रहती थी पर एक बार किसी मसले पर घरवालों के सामने भयंकर लड़ाई हो गई व ग़ुस्से मे रौनक ने परी को ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया । परी ने इसके जवाब में कोई वस्तु उठाकर रौनक की तरफ़ फेंकी दी ।

रौनक ने इसे अपना insult समझा, घरवालो ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को वस्तु से मारने वाली औरत न तो संस्कारित होती है ,न वफादार ,न पतिव्रता

मामला परी के घरवालों तक भी पहुँचा तो वो भी रौनक को मारने के क्रूर व्यवहार का दोषी मानने लगे ।

बुरी बातें राई को पहाड़ बना देती है सो दोनों तरफ खूब आरोप उछाले गए।गुस्से मे बात तलाक़ तक पहुँच गई व मुकदमा दर्ज कराया गया।सबके कहे अनुसार रौनक ने परी की चरित्रहीनता का तो परी ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया ।मुकदमा दो साल तक चला।दो साल से दोनो अलग रह रहे थे । मुकदमे की सुनवाई पर दोनों के साथ रिश्तेदार होते ,जिनकी थोड़ी सहानुभूति के साथ आग मे घी डालने वाली बाते भी छुपी होती ।दोनों को अच्छा खासा पाठ पढ़ाया जाता कि उन्हें कोर्ट मे क्या कहना है। दोनों वही कहते। बहुत बहसबाजी व आरोपो के बाद दोनों में तलाक हो गया।

तलाक के बाद परी चुप व गमगीन थी और रौनक खामोश व असहज था। दोनो के हाथ में तलाक के काग़ज़ों की कॉपी थी। परी ने आख़िरी बार बात करने के हिसाब से रौनक से कहा कि congratulations ! तुम जो चाहते थे वही हुआ ।

रौनक बोला तुम्हें भी बधाई हो ! तुमने भी तो तलाक पाकर आजादी हासिल की है।

वह बहुत ही असहज होकर बोली कि क्या तुम्हे लगता है कि तलाक पाने मे आजादी है ?

तुमने मुझे चरित्रहीन व संस्कारहीन कहा था ,अब अच्छा हुआ कि तुम्हारा ऐसी स्त्री से पीछा छूटा

रौनक शर्मिंदगी से बोला कि वो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी, मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था

परी बोली कि मैंने इस कारण बहुत मानसिक तनाव झेला है

जानता हूँ मै ,इस बात से तुम्हारा मन और आत्मा कितनी लहू लुहान हो गई होगी ।मुझे तुम्हारे बारे में ऐसी गंदी बात नहीं करनी चाहिए थी। तुम तो बहुत पवित्र हो ।मै बहुत शर्मिंदा हूँ । तुमने भी तो मुझे दहेज का लोभी व क्रूर कहा था।

वह मैंने गलत कहा था , मै कुछ और कहती लेकिन सबके दवाब मे आकर ….

अब तुम्हारा सिर का दर्द यानि माइग्रेन कैसा है?

कुछ खास फर्क नही पहले जैसा ही है । कभी बाम लगा लेती हूँ तो कभी pain killer खा लेती हूँ …

तुम्हारी डायबिटीज़ व गर्दन का दर्द कैसे है ? परी ने पूछा।

डॉक्टर ने stress कम करने को कहा है …..

रौनक कुछ सोचता रहा, फिर बोला, कोर्ट के अनुसार तुम्हें पच्चीस लाख रुपए देने हैं और बीस हज़ार रुपए हर महीना । दस लाख रुपए अभी दे दूँगा बाक़ी का भी जल्द से जल्द इंतज़ाम कर दूँगा ,फिलहाल मेरे पास नहीं है । रौनक ने अपने मन की बात कही।

कोई बात नही अभी तुम्हारे पास नहीं है तो मुझे मत देना ….परी ने कहा। उसके स्वर में पुराने संबंधों की महक थी।

रौनक उसका चेहरा देखकर सोच रहा था कि

ये औरत जो कभी उसकी पत्नी हुआ करती थी। मेरा हर बात मे कितना ध्यान रखती थी, मेरे डायबिटीज के हिसाब से खाना बनाती । हर महीने स्वयं के लिये कंजूसी करती, पैसे बचाती, और सबकी जरूरत का सामान खरीद लाती। अपनी परवाह ना करके मेरी व परिवार वालों की परवाह करती रहती और कभी जाहिर भी नहीं होने देती ।कितनी संवेदना थी इसमें। मैं अपने पुरूष होने का दम भरता रहा । काश, मैं इसकी importantace को महसूस कर पाता।

और परी सोच रही थी, कितना सीधा व सरल स्वभाव का है ,जो कभी उसका पति हुआ करता था। कितना प्यार करता था मुझसे।

एक बार जब वह बीमार पड़ी तो पूरी रात नही सोया और उसके लिये खाना बनाया और घर साफ किया । पलंग से नीचे पाव भी रखने नही दिया । कितना अच्छा है,मैं ही खोट निकालती रही ।

दोनो चुप्पी साधे एक दूसरे को भीगी आँखों से देखते रहे …..

सुनो परी ! वह झिझकते हुये बोला कि मुझे एक बात कहनी है ।कहने से डरता हूँ पर कहना भी चाहता हूँ क्योंकि आज नही तो यह कभी नही कह पाऊँगा । परी बोली कि डरो मत ,हो सकता है जो तुम कहना चाहते हो वही बात मेरे मन की भी बात हो ।

तुमसे अलग होने के बाद भी तुम्हारी बहुत याद आती रही पर ego के कारण कभी ज़ाहिर नही किया ।परी मैं तुम्हें अब भी प्रेम करता हूँ , तुम्हारे बिना जिन्दगी सोचकर ही रूह काँप जाती है

और मेरी भी यही हालत है रौनक़ ! दोनों की ऑंखें भावुकता से कुछ ज़्यादा ही सजल हो गई थीं।

रौनक़ ने उसके हाथ को पकड़ते हुये बोला कि क्या अभी भी हम दोनों जीवन को नयामोड़ नहीं दे सकते?

परी बोली अब तलाक हो चुका है ,कौन सा मोड़ ?

हम फिर से साथ साथ रहने लगें …..पति-पत्नी के साथ साथ बहुत अच्छे दोस्त बन कर भी ..

ये तलाक के पेपर ! परी ने पूछा ?

फाड़ देते हैं रौनक़ ने कहा ।

दोनो ने एक साथ बिना देरी किये तलाक के सारे काग़ज़ात फाड़ दिये व उठ खड़े हुए व एक दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर मुस्कराते हुये चल दिये उस घर की तरफ जो सिर्फ दोनो का था ।दोनों पक्षों के घर वाले व रिश्तेदार ये देखकर हैरान व परेशान थे।

इतना सुनते ही वह व्यक्ति बोला मित्र मै चलता हूँ ,मुझे भी किसी से बहुत कुछ कहना है …बहुत बहुत धन्यवाद ,आज तुमने बहुत बडा अनर्थ होने से बचा लिया । कही मुझे भी देरी ना हो जाये ….

आजकल तलाक होने की संख्या मे बढ़ोतरी होती जा रही है जो कही से भी उचित नही है ।

पति पत्नी रिश्ते मे प्यार और तकरार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं ।

इस खूबसूरत रिश्ते मे ego को न आने दे वरना यह रिश्ते को दीमक की तरह खोखला करता हुआ ख़त्म कर डालता है ।

आपस मे कोई बात होने पर गुस्से मे व जल्दी मे कोई ऐसा फैसला न लें कि जिंदगी भर अफसोस हो ।


आपका आभारी विमला विल्सन

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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